

धर्म डेस्क (वीकैंड रिपोर्ट)- Chaturmas 2026 Rules : हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। ‘चातुर्मास’ का अर्थ है चार महीने, जिन्हें साधना, आत्म-संयम, जप, तप और भक्ति का सबसे शुभ समय माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा (शयन) में चले जाते हैं। इसी कारण विवाह सहित कई मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 25 जुलाई 2026 से चातुर्मास की शुरुआत हो रही है, जो देवोत्थान एकादशी तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु व्रत, पूजा-पाठ और सात्विक जीवनशैली अपनाकर आध्यात्मिक उन्नति का प्रयास करते हैं।
क्या है चातुर्मास का धार्मिक महत्व?
हिंदू पंचांग के अनुसार, चातुर्मास की शुरुआत देवशयनी एकादशी से होती है और समापन कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवोत्थान एकादशी) पर होता है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में रहते हैं और सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी अन्य देवताओं पर रहती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग में पूरी सृष्टि दान में ली थी और उन्हें पाताल लोक का स्वामी बनाकर उनकी रक्षा का वचन दिया था। कहा जाता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु राजा बलि के लोक की रक्षा करते हैं। यही कारण है कि यह समय भक्ति, तपस्या और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
Chaturmas 2026 Rules : चातुर्मास में किस महीने किस देवता की करें पूजा?
आषाढ़ (अंतिम चरण)
इस समय भगवान वामन और गुरु की पूजा का विशेष महत्व होता है। आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है।
श्रावण (सावन)
पूरा महीना भगवान शिव की आराधना को समर्पित माना जाता है। शिव पूजा से सुख, समृद्धि, वैवाहिक जीवन और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
भाद्रपद
यह महीना भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इसी माह श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।
आश्विन
आश्विन कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष और शुक्ल पक्ष में शारदीय नवरात्र मनाए जाते हैं। इस दौरान पितरों का श्राद्ध और मां दुर्गा की उपासना का विशेष महत्व होता है।
कार्तिक
कार्तिक मास भगवान विष्णु और तुलसी माता की पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इसी महीने देवोत्थान एकादशी के साथ विवाह और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।
Chaturmas 2026 Rules : चातुर्मास में किन कार्यों की होती है मनाही?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के दौरान कई मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
- विवाह और सगाई जैसे शुभ संस्कार।
- गृह प्रवेश और भवन निर्माण की नींव रखना।
- मुंडन और जनेऊ (उपनयन) संस्कार।
- नए व्यवसाय या बड़े शुभ कार्य की शुरुआत।
भोजन से जुड़े महत्वपूर्ण नियम
चातुर्मास में सात्विक जीवनशैली अपनाने पर विशेष जोर दिया जाता है।
- दिन में एक समय भोजन करना श्रेष्ठ माना गया है।
- प्याज, लहसुन, मांसाहार और मदिरा से परहेज करें।
- फल, दूध और जल का अधिक सेवन करें।
- जप, ध्यान, पूजा और धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में समय दें।
चातुर्मास में करें ये विशेष उपाय
- गुरु पूर्णिमा पर गुरु का पूजन करें।
- सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करें।
- भाद्रपद में श्रीकृष्ण की पूजा और भजन करें।
- आश्विन में पितरों का श्राद्ध और मां दुर्गा की आराधना करें।
- कार्तिक में भगवान विष्णु और तुलसी माता की पूजा करें।
Chaturmas 2026 Rules : चातुर्मास क्यों माना जाता है खास?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास केवल पूजा-पाठ का समय नहीं, बल्कि आत्मसंयम, स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक विकास का भी अवसर है। इस अवधि में सात्विक जीवनशैली अपनाने और धार्मिक नियमों का पालन करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होने की मान्यता है।
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