

जालंधर (वीकेंड रिपोर्ट)- Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित्त सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया। सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान राकेश शर्मा से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।

सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित गुरूवारिय अलौकिक हवन यज्ञ के दौरान यज्ञ कुंड में प्रज्वलित पावन अग्नि अपनी दिव्य आभा से संपूर्ण वातावरण को आलोकित कर रही थी। वैदिक मंत्रोच्चारण की मधुर स्वर-लहरियों और भक्तों की श्रद्धा ने पूरे धाम को आध्यात्मिक ऊर्जा एवं भक्ति रस से सराबोर कर दिया। इस पावन अवसर पर धाम के पीठ उपासक नवजीत भारद्वाज ने संत रहीम के प्रसिद्ध दोहे—
‘‘चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध-नरेस।
जा पर बिपदा परत है, सो आवत एह देस॥’’
का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए कहा कि संत रहीम ने इन पंक्तियों में प्रभु श्रीराम की शरण और भक्ति का अत्यंत गहरा संदेश दिया है। चित्रकूट में प्रभु श्रीराम का निवास बताकर रहीम जी यह समझाते हैं कि जब मनुष्य के जीवन में विपत्ति आती है, तब वह सांसारिक सहारों को छोडक़र प्रभु की शरण में पहुंचता है।

नवजीत भारद्वाज ने कहा कि जीवन में सुख आए तो हम अक्सर अपने सामथ्र्य धन, रिश्तों और पद पर भरोसा करने लगते हैं। लेकिन जब विपत्ति आती है, जब कोई रास्ता दिखाई नहीं देता, जब अपने भी साथ छोड़ देते हैं, तब मनुष्य की जुबान से स्वाभाविक रूप से निकलता है हे प्रभु, अब आप ही सहारा हैं।

Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : नवजीत भारद्वाज ने कहा कि जीवन में विपत्ति आना मनुष्य के हाथ में नहीं है, लेकिन विपत्ति में टूट जाना या प्रभु पर विश्वास बनाए रखना हमारे हाथ में जरूर है। उन्होंने कहा, जिसके पास राम का नाम है, उसके पास सबसे बड़ा सहारा है। प्रभु का नाम मनुष्य को केवल आध्यात्मिक शांति ही नहीं देता, बल्कि कठिन परिस्थितियों से लडऩे का साहस और भीतर से मजबूत बनने की शक्ति भी प्रदान करता है।

नवजीत भारद्वाज ने दोहे की गहराई समझाते हुए कहा कि चित्रकूट केवल एक धार्मिक तीर्थस्थान नहीं, बल्कि त्याग, धैर्य, तपस्या, मर्यादा और प्रभु-भक्ति का प्रतीक है। प्रभु श्रीराम ने राजमहल का सुख छोडक़र वनवास का मार्ग स्वीकार किया, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने धर्म और मर्यादा का त्याग नहीं किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य को अपने धर्म, सत्य और विश्वास के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए।

प्रवचन के दौरान नवजीत भारद्वाज ने कहा कि हम अक्सर भगवान के सामने जाकर प्रार्थना करते हैं प्रभु मेरी परेशानी दूर कर दो, मेरे घर में धन दे दो, मेरी इच्छा पूरी कर दो। लेकिन भक्ति का वास्तविक अर्थ इससे कहीं गहरा है। उन्होंने कहा कि प्रभु से हमें यह मांगना चाहिए, हे प्रभु! मुझे इतना सामथ्र्य दीजिए कि विपत्ति में मैं टूट ना जाऊं, सुख में अहंकारी न बनूं और हर परिस्थिति में आपका नाम मेरे हृदय में बना रहे। उन्होंने कहा कि सुख मांगने से बेहतर है कि हम प्रभु का साथ मांगें, क्योंकि यदि प्रभु का साथ मिल जाए तो कठिन से कठिन रास्ता भी आसान हो जाता है।

प्रवचन के समापन पर नवजीत भारद्वाज ने माँ भक्तों को संदेश देते हुए कहा कि जीवन की कठिनाइयां मनुष्य को कमजोर करने नहीं, बल्कि उसे मजबूत बनाने आती हैं। जब भी जीवन में विपरीत परिस्थितियां आएं तो घबराने के बजाय प्रभु श्रीराम को याद करें और स्वयं से कहें, यह समय भी बीत जाएगा। इसलिए प्रभु से केवल सुख मत मांगिए, प्रभु का साथ मांगिए। क्योंकि जिसके साथ राम हैं, उसके जीवन में सबसे बड़ा संबल स्वयं प्रभु का नाम है।

Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : इस अवसर पर सरोज बाला, समीर कपूर,प्रदीप , दिनेश सेठ,रोहित भाटिया,जानू थापर,नरेश,कोमल, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, नवदीप,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,राकेश, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत, मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता, अमनदीप , अवतार,दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू,संजीव शर्मा,मुकेश, रजेश,अमन शर्मा, वरुण, नितिश, रवि भल्ला,जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर, प्रिंस कुमार, पप्पू, नरेंद्र, सौरभ, नरेश,दिक्षित, अनिल सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।
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