

मुंबई (वीकैंड रिपोर्ट)- The India Story Review : अगर आपकी रोज की थाली में परोसा जाने वाला खाना ही धीरे-धीरे आपकी सेहत के लिए खतरा बन जाए, तो क्या होगा? इसी गंभीर सवाल को केंद्र में रखकर बनाई गई है ‘The India Story’। श्रेयस तलपड़े और काजल अग्रवाल अभिनीत यह कोर्टरूम ड्रामा केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, खेती में रसायनों के बढ़ते इस्तेमाल और सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल उठाने की कोशिश करता है। हालांकि विषय बेहद मजबूत है, लेकिन फिल्म उसे उतनी प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर पेश नहीं कर पाती।
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी मेजर योगेश पाटिल (श्रेयस तलपड़े) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी मासूम बेटी परी (तृषा सरदा) कैंसर से जिंदगी की जंग हार जाती है। योगेश का मानना है कि उसकी बेटी की मौत केवल बीमारी से नहीं, बल्कि जहरीले कीटनाशकों और मिलावटी खाद्य पदार्थों के कारण हुई है। जब पुलिस और कानूनी व्यवस्था उसका साथ छोड़ देती है, तब पहली बार कोर्ट में केस लड़ रही एडवोकेट अर्चना (काजल अग्रवाल) उसके समर्थन में खड़ी होती हैं। इसके बाद अदालत में सरकार, बड़ी कीटनाशक कंपनियों और कृषि व्यवस्था के खिलाफ एक लंबी कानूनी लड़ाई शुरू होती है, जो पूरे देश में बहस का विषय बन जाती है।
मजबूत मुद्दा, लेकिन कमजोर पटकथा
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका विषय है। कहानी में खाने में मिलावट, फसलों में जहरीले रसायनों का इस्तेमाल, दूध में मिलावट और बढ़ते कैंसर के मामलों जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया गया है। पंजाब की चर्चित ‘कैंसर ट्रेन’ और केरल के कीटनाशक विवाद जैसी वास्तविक घटनाओं का संदर्भ कहानी को और विश्वसनीय बनाता है। हालांकि, इतना महत्वपूर्ण विषय होने के बावजूद फिल्म की पटकथा दर्शकों को पूरी तरह बांध नहीं पाती। कोर्टरूम ड्रामा में जिस तरह के धारदार तर्क, दमदार बहस और प्रभावशाली संवादों की उम्मीद की जाती है, उनकी कमी साफ महसूस होती है। विरोधी पक्ष को भी पर्याप्त मजबूती नहीं दी गई, जिससे अदालत की पूरी कार्यवाही एकतरफा और फीकी नजर आती है।
The India Story Review : भावनात्मक दृश्यों की अधिकता
फिल्म का पहला भाग संतुलित गति से आगे बढ़ता है, लेकिन दूसरे हिस्से में अस्पताल और इलाज से जुड़े दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे हो जाते हैं। कई स्थानों पर कहानी भावनात्मक मेलोड्रामा में बदल जाती है, जिससे मुख्य मुद्दे का प्रभाव कुछ कम हो जाता है। क्लाइमैक्स भी उस स्तर का असर नहीं छोड़ पाता, जिसकी इस विषय से उम्मीद की जाती है।
कलाकारों का अभिनय कैसा है?
श्रेयस तलपड़े ने एक टूटे हुए पिता के दर्द और संघर्ष को बेहद ईमानदारी से निभाया है। खासतौर पर दूसरे हाफ में उनका अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आता है। काजल अग्रवाल एक जुझारू वकील की भूमिका में प्रभावशाली नजर आती हैं, हालांकि कुछ दृश्यों में उनका अभिनय थोड़ा अधिक नाटकीय महसूस होता है। छोटी परी के किरदार में तृषा सरदा ने अपनी मासूमियत और भावनात्मक दृश्यों से प्रभावित किया है। मुरली शर्मा और मनीष वाधवा ने भी सीमित स्क्रीन टाइम में अच्छा प्रदर्शन किया है।
तकनीकी पक्ष
फिल्म का संगीत औसत है और कोई भी गीत लंबे समय तक याद नहीं रहता। बैकग्राउंड स्कोर कहानी के साथ न्याय करता है, जबकि सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन डिजाइन विषय के अनुरूप हैं। हालांकि कुछ दृश्यों में AI आधारित विजुअल्स अस्वाभाविक लगते हैं। एडिटिंग को और बेहतर बनाया जा सकता था।
फाइनल वर्ड
‘The India Story’ एक ऐसे सामाजिक मुद्दे पर आधारित फिल्म है, जिस पर चर्चा होना बेहद जरूरी है। यह दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि उनकी थाली में परोसा जाने वाला भोजन कितना सुरक्षित है। हालांकि कमजोर लेखन, साधारण कोर्टरूम ड्रामा, जरूरत से ज्यादा भावनात्मक प्रस्तुति और कमजोर क्लाइमैक्स इसकी संभावनाओं को पूरी तरह साकार नहीं होने देते। यदि आप सामाजिक मुद्दों पर आधारित गंभीर फिल्में देखना पसंद करते हैं या श्रेयस तलपड़े और काजल अग्रवाल के अभिनय के प्रशंसक हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है। लेकिन यदि आप एक रोमांचक और दमदार कोर्टरूम थ्रिलर की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो यह फिल्म आपको पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाएगी।
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