
वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 3 जून 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- US Tariff on India : एक ओर अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन भारत समेत कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्ताव ने दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के बीच नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने भारत सहित 60 देशों के खिलाफ नया शुल्क लगाने का प्रस्ताव जारी किया है। यूएसटीआर का कहना है कि इन देशों ने जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से निर्मित वस्तुओं के निर्यात पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं, जिससे अमेरिकी व्यापार और उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
अमेरिकी व्यापार कानून 1974 की धारा 301 के तहत की गई समीक्षा में यूएसटीआर ने पाया कि संबंधित देशों की कुछ नीतियां और व्यापारिक प्रक्रियाएं अमेरिकी व्यवसायों के लिए अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न करती हैं तथा निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करती हैं। एजेंसी के अनुसार, भारत समेत 54 देश ऐसे उत्पादों के निर्यात को रोकने में विफल रहे हैं, जिनके निर्माण में जबरन श्रम का इस्तेमाल होने की आशंका जताई जाती है।
US Tariff on India : इस सूची में भारत के अलावा चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, सऊदी अरब, सिंगापुर, ब्रिटेन, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कई प्रमुख व्यापारिक साझेदार देश भी शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रस्ताव केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर व्यापारिक नियमों को लेकर अमेरिकी प्रशासन की सख्ती का हिस्सा है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के निर्यात को रोकने में विफल रहना स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति अमेरिकी कामगारों और उद्योगों को असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए मजबूर करती है, जिससे घरेलू उत्पादन प्रभावित होता है।
यूएसटीआर ने इन देशों पर 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है और इस संबंध में सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। एजेंसी का मानना है कि जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों के आयात पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से वैश्विक स्तर पर ऐसे श्रम के उन्मूलन के प्रयास कमजोर पड़ते हैं।
US Tariff on India : यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर लगातार बातचीत जारी है। हाल के महीनों में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, जिनमें बाजार पहुंच, शुल्क संरचना, डिजिटल व्यापार और कृषि क्षेत्र से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और चल रही व्यापार वार्ताओं पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला लेने से पहले अमेरिकी प्रशासन सार्वजनिक सुझावों, उद्योग संगठनों और संबंधित देशों की प्रतिक्रियाओं पर विचार करेगा।
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