
चंडीगढ़, 31 मई 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Himachal Entry Tax Protest : हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वाहनों पर लगाए जा रहे एंट्री टैक्स के विरोध में अब आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया है। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सीमाओं से जुड़े 55 एंट्री और एग्जिट प्वाइंट्स पर 1 जून को चार घंटे का व्यापक चक्का जाम किया जाएगा। इस दौरान तीनों राज्यों से जुड़े प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रह सकती है।
इस संबंध में पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा और किरती किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वीर सिंह बड़वा ने संयुक्त प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि हिमाचल सरकार का एंट्री टैक्स फैसला आम जनता, टैक्सी चालकों, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों, किसानों, छोटे व्यापारियों और पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के लिए आर्थिक बोझ बन चुका है।
आम जनता की जेब पर पड़ रहा सीधा असर
नेताओं ने कहा कि हिमाचल प्रदेश आने-जाने वाले लाखों लोगों को इस टैक्स के कारण अतिरिक्त आर्थिक भार उठाना पड़ रहा है। खासकर टैक्सी ऑपरेटरों, टूर एंड ट्रैवल कारोबारियों और छोटे व्यापारियों को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने की बजाय सरकार की यह नीति लोगों को परेशान कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एंट्री टैक्स के कारण हिमाचल में पर्यटन गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं और इसका असर स्थानीय व्यापार पर भी पड़ रहा है।
Himachal Entry Tax Protest : 55 स्थानों पर होगा विरोध प्रदर्शन
आंदोलनकारी संगठनों के अनुसार 1 जून को पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सीमाओं से जुड़े 55 एंट्री एवं एग्जिट प्वाइंट्स पर एक साथ चक्का जाम किया जाएगा। यह प्रदर्शन चार घंटे तक चलेगा और इस दौरान बड़ी संख्या में किसान संगठन, सामाजिक संस्थाएं, ट्रांसपोर्ट यूनियनें और स्थानीय लोग भाग लेंगे।
आंदोलन के आयोजकों ने दावा किया कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन सरकार पर दबाव बनाने के लिए इसे व्यापक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है।
पंजाब सरकार से भी मांगा स्पष्ट रुख
गौरव राणा और वीर सिंह बड़वा ने पंजाब सरकार से भी इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब के हजारों लोग रोजाना हिमाचल प्रदेश में व्यापार, पर्यटन और अन्य कार्यों के लिए जाते हैं, इसलिए पंजाब सरकार को अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि सरकारें समय रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं करतीं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा भविष्य में बड़े स्तर पर संघर्ष की रणनीति बनाई जाएगी।
व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों ने भी जताई नाराजगी
विरोध प्रदर्शन को कई व्यापारी संगठनों और ट्रांसपोर्ट यूनियनों का भी समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है कि पहले से बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों के बीच अतिरिक्त एंट्री टैक्स कारोबारियों की लागत बढ़ा रहा है। इसका असर सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
Himachal Entry Tax Protest : प्रशासन अलर्ट मोड पर
1 जून को प्रस्तावित चक्का जाम को देखते हुए संबंधित जिलों के प्रशासन और पुलिस विभाग ने भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जा सकता है ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
आंदोलनकारी संगठनों ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है और कहा है कि उनका उद्देश्य जनता की आवाज सरकार तक पहुंचाना है।
सरकार से जल्द समाधान की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि हिमाचल प्रदेश सरकार एंट्री टैक्स को वापस लेती है या इस पर पुनर्विचार करती है तो आंदोलन समाप्त किया जा सकता है। फिलहाल 1 जून का चक्का जाम एंट्री टैक्स के खिलाफ जनआक्रोश का बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है।
हिमाचल एंट्री टैक्स के खिलाफ बड़ा आंदोलन: 1 जून को 55 बॉर्डर प्वाइंट्स पर 4 घंटे का चक्का जाम, पंजाब-हरियाणा के संगठन भी होंगे शामिल
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