
नई दिल्ली, 21 मई 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Pahalgam Terror Attack : राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट में कश्मीर के चर्चित पहलगाम आतंकी हमले को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक, स्थानीय गाइड परवेज और बशीर अहमद चाहते तो 26 पर्यटकों की जान बचाई जा सकती थी, लेकिन उनकी कथित मदद और चुप्पी ने आतंकियों को हमला करने का मौका दे दिया। चार्जशीट के अनुसार, 21 अप्रैल 2025 को तीन आतंकी — फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी — पहलगाम इलाके में घूम रहे थे। तीनों ने स्थानीय लोगों से संपर्क कर सुरक्षित ठिकाने की मांग की।
गाइडों ने आतंकियों को दी पनाह
NIA के सामने दिए बयान में बशीर अहमद ने स्वीकार किया कि उसने तीनों आतंकियों को देखा था। आतंकियों ने उससे मदद मांगी, जिसके बाद वह उन्हें एक पेड़ के नीचे रुकने को कहकर परवेज की झोपड़ी पर पहुंचा। चार्जशीट के मुताबिक, बशीर ने परवेज और उसकी पत्नी को चुप रहने के लिए कहा और फिर शाम करीब 5 बजे आतंकियों को इशारे से झोपड़ी में बुला लिया। जांच में सामने आया है कि आतंकियों के पास हथियार थे और उनके बैग भी हथियारों से भरे हुए थे। वे उर्दू में बात कर रहे थे लेकिन उनका लहजा पंजाबी था। बशीर ने पूछताछ में माना कि हुलिया देखकर वह समझ गया था कि वे “मुजाहिद” यानी आतंकी हैं।
Pahalgam Terror Attack : आतंकियों को खाना-पानी और जरूरी सामान दिया
चार्जशीट के अनुसार, आतंकियों ने खुद को थका और प्यासा बताते हुए अल्लाह के नाम पर मदद मांगी। इसके बाद परवेज और बशीर ने उन्हें पानी पिलाया, चाय दी और खाना खिलाया। तीनों आतंकी करीब पांच घंटे तक झोपड़ी में रुके रहे। इस दौरान उन्होंने अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा बलों की मूवमेंट, कैंपों और इलाके की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी अहम जानकारी भी जुटाई। NIA का दावा है कि दोनों स्थानीय लोगों को इस बात का पूरा अंदाजा था कि वे आतंकियों की मदद कर रहे हैं।
जाते समय पैक कर दी 10 रोटियां
रात करीब 10 बजे जब आतंकी वहां से निकले, तो परवेज और बशीर ने उनके लिए 10 रोटियां और सब्जी पैक करके दी। चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि आतंकियों ने बदले में परवेज को 3 हजार रुपये दिए थे। साथ ही हल्दी, मिर्च, नमक, पतीला और करछी जैसे सामान भी अपने साथ ले गए।
हमले से कुछ घंटे पहले फिर दिखे थे आतंकी
जांच में यह भी सामने आया है कि 22 अप्रैल 2025 यानी हमले वाले दिन भी परवेज और बशीर ने उन्हीं तीनों आतंकियों को बैसरन घाटी के बाहर फेंस पर बैठे देखा था। दोनों उस दिन कुछ पर्यटकों को लेकर बैसरन घाटी गए थे। जब वे वापस लौट रहे थे, तभी उनकी नजर आतंकियों पर पड़ी और वे सतर्क हो गए। लेकिन उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को कोई सूचना नहीं दी। कुछ देर बाद ही बैसरन घाटी में बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई।
Pahalgam Terror Attack : हमले के बाद हो गए थे अंडरग्राउंड
चार्जशीट के मुताबिक, हमले के बाद दोनों स्थानीय गाइड अचानक अंडरग्राउंड हो गए थे। जांच एजेंसियों को इसी बात से उन पर शक गहराया और बाद में पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए। NIA का कहना है कि इस पूरे हमले में आतंकियों को स्थानीय स्तर पर मदद मिली, जिसने उन्हें इलाके में छिपने, मूवमेंट करने और हमला प्लान करने में सहायता पहुंचाई। यह मामला अब कश्मीर में आतंकी नेटवर्क और लोकल सपोर्ट सिस्टम को लेकर नई बहस छेड़ता दिख रहा है।
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