

जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)- LPG Gas Black Marketing : केंद्र सरकार और गैस कंपनियों द्वारा एलपीजी सिलेंडर वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए ई-केवाईसी, ओटीपी सत्यापन और अन्य डिजिटल व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। शहर में घरेलू गैस सिलेंडरों की कथित कालाबाजारी का मामला सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार कुछ गैस एजेंसियों के डिलीवरी मैन और गैस माफिया के बीच कथित मिलीभगत के चलते घरेलू गैस सिलेंडरों की खुलेआम कालाबाजारी की जा रही है। सामने आई तस्वीरों और वीडियो में कथित तौर पर देखा जा सकता है कि स्कूटी पर एक साथ 5-5 घरेलू गैस सिलेंडर लादकर कालाबाजारियों तक पहुंचाए जा रहे हैं।
969 रुपए का सिलेंडर 1500 रुपए तक में बेचने का आरोप
जानकारी के मुताबिक 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर, जिसकी निर्धारित कीमत करीब 969 रुपए है, उसे कथित रूप से 1300 से 1500 रुपए तक में बेचा जा रहा है। आरोप है कि यह सिलेंडर जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक पहुंचने के बजाय सीधे कालाबाजारियों के हाथों में पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर बुक करवाने से लेकर उसकी डिलीवरी मिलने तक कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई उपभोक्ता समय पर सिलेंडर न मिलने और बार-बार संपर्क करने की मजबूरी की शिकायत भी करते रहे हैं।
LPG Gas Black Marketing : सरकारी दावों पर उठे सवाल
घरेलू गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए गैस कंपनियों और संबंधित विभागों की ओर से लगातार दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन आरोप है कि शहर के कई इलाकों में यह अवैध कारोबार खुलेआम जारी है। जानकारों का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडरों का गलत इस्तेमाल और अवैध भंडारण किसी बड़े हादसे का कारण भी बन सकता है।
‘जल्द होगा बड़ा एक्शन’ : कंट्रोलर
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कंट्रोलर सरताज सिंह चीमा और लखबीर सिंह संधू ने कहा है कि घरेलू गैस की कालाबाजारी और अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ जल्द सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर Essential Commodities Act, 1955 के तहत केस दर्ज करवाए जाएंगे। फिलहाल विभाग की आगामी कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला न केवल गैस वितरण व्यवस्था की खामियों को उजागर करेगा, बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करेगा।
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