
जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट): मौसम बदल रहा है और हर कोई जानता है कि यह समय कई बीमारियों को ले के आता है चाहे इंफेक्शन हो, या स्किन की प्रोब्लम्स लोग परेशान रहते हैं. गर्मियों में ठंडी चीजों को खाने पीने का ज्यादा मन होता है, लेकिन अचानक गर्म चीजों से ठंडी की ओर जाने पर हमारे गले में इंफेक्शन या कई और समस्याएं हो सकती हैं. ठंडी चीजों के इस्तेमाल से परहेज करें, ताकि गले में किसी तरह के इंफेक्शन का खतरा नहीं रहे. गले में इंफेक्शन के कई लक्षण हैं, जैसे गले में दर्द, गर्दन में सूजन और कई बार कान के नीचे तक दर्द होना शामिल है,
जानिए एलर्जी से बचने के उपाए
हीट स्ट्रोक
हीट स्ट्रोक या कहें लू, गर्मियों की सबसे कॉमन बीमारी है, जो शरीर में पानी की कमी की वजह से इसे अपनी चपेट में ले लेती है. वैसे तो गर्मियों में लू लगना काफी कॉमन माना जाता है, लेकिन अगर सही समय पर इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकती है. हीट स्ट्रोक में फूड प्वॉइजनिंग, बुखार, पेट दर्द और उल्टी आने की समस्याएं होने लगती हैं, ऐसे में जरूरी है इसका उचित इलाज
एसिडिटी
एसिडिटी गर्मियों में होने वाली सबसे बड़ी समस्या है और यात्रा के दौरान अगर एसिडिटी की प्रॉब्लम हो जाए तब तो बस लगता है जान ही निकल गई. एसिडिटी में सीने में जलन और दर्द, उल्टी जैसा महसूस होना जैसी और भी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में जब यह तकलीफ बार-बार होने लगती है तो यह गंभीर समस्या का रूप ले लेती है और कई बार तो यह लोगों को हॉस्पिटल तक पहुंचा देती है. ऐसे में जरूरी है कि इससे बचने के लिए पहले से ही सतर्क हो जाएं और खान पान पर कंट्रोल करें.
गर्मियों में स्किन का भी रखें ध्यान
गर्मियों में जहां अपने साथ आम, शरबत, तरबूज आदि की बहार लाती हैं, वहीं स्किन की समस्याएं भी लेकर आती हैं। रैशेज, घमौरियां, फुंसियां, सनबर्न आदि गर्मियों की कॉमन समस्याएं हैं। शरीर के वे हिस्से, जिन पर स्किन फोल्ड होती है, मसलन बगल, जांघ, पेट आदि में पसीना ज्यादा आता है और वहां रैशेज हो जाते हैं। जो लोग लगातार बैठे रहते हैं या घंटों बैठकर गाड़ी चलाते रहते हैं, उन्हें दिक्कतें ज्यादा आती हैं। गर्मियों की कॉमन स्किन प्रॉब्लम हैं:
रैशेज और घमौरियां
गमिर्यों में पसीना निकलने से स्किन में ज्यादा मॉश्चर रहता है, जिसमें कीटाणु (माइक्रोब्स) आसानी से पनपते हैं। इस दौरान ज्यादा काम करने से स्वेट ग्लैंड्स यानी पसीने की ग्रंथियां ब्लॉक हो जाती हैं। ऐसा होने पर पसीना स्किन की अंदरूनी परत के अंदर जमा रह जाता है। घमौरियां और रैशेज होने पर स्किन लाल पड़ जाती है और उसमें खुजली व जलन होती है। रैशेज से स्किन में दरारें-सी नजर आती हैं और स्किन सख्त हो जाती है, वहीं घमौरियों में लाल-लाल दाने निकल आते हैं। बाहर की स्किन की परत ब्लॉक होने पर दाने वाली घमौरियां निकलती हैं। ये आमतौर पर बच्चों में बुखार के दौरान निकलती हैं। इसके लिए किसी दवा की जरूरत नहीं होती।
खुजली दूर करने के लिए पुदीने का तेल
कीड़े के काटने पर खरोंच करने के बजाय, एक बूंद या दो पेपरमिंट तेल लगाएं. इसका एक शीतलन प्रभाव है, और काटने की प्रक्रिया को भी बढ़ाता है, जिससे उपचार प्रक्रिया तेज हो जाती है. वैकल्पिक रूप से, अगर आपके पास टूथपेस्ट है जिसमें पेपरमिंट तेल होता है, तो एक थपका लगाएं.
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