





नई दिल्ली (वीकैंड रिपोर्ट)- India Fuel Export Duty Changes : केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से शनिवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया गया है। सरकार के नए फैसले के तहत डीजल पर निर्यात शुल्क 3 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
पेट्रोल, डीजल और ATF पर अब कितना लगेगा शुल्क?
सरकार की ओर से जारी नई दरों के मुताबिक:
| पेट्रोलियम उत्पाद | पुराना शुल्क | नया शुल्क |
|---|---|---|
| पेट्रोल | ₹2.50 प्रति लीटर | शून्य |
| डीजल | ₹8.50 प्रति लीटर | ₹11.50 प्रति लीटर |
| ATF | ₹10.50 प्रति लीटर | ₹11 प्रति लीटर |
इस बदलाव के बाद पेट्रोल के निर्यात पर अब विशेष अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। वहीं, डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर पहले से ज्यादा शुल्क देना होगा।
क्यों लिया गया सरकार ने यह फैसला?
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बीच सरकार ने निर्यात शुल्क में बदलाव किया है। इससे पहले मार्च के अंत में पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क लागू किए गए थे। इन दरों की समीक्षा केंद्र सरकार हर 15 दिन में करती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अधिक हों, तब रिफाइनरी कंपनियां घरेलू बाजार की जरूरतों को नजरअंदाज करके निर्यात को प्राथमिकता न दें।
India Fuel Export Duty Changes : हॉर्मुज स्ट्रेट में तनाव से बढ़ी तेल आपूर्ति की चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है। दिए गए बाजार आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत 113.10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसमें पिछले एक सप्ताह में 1.55 प्रतिशत, एक महीने में 15.71 प्रतिशत और तीन महीनों में करीब 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
भारत के लिए क्यों अहम है हॉर्मुज स्ट्रेट?
हॉर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। संघर्ष से पहले भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से आता था। इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से भारत को कच्चा तेल मंगाने के लिए दूसरे विकल्पों पर भी ध्यान देना पड़ रहा है। ऐसे हालात में सरकार की ओर से निर्यात शुल्क की समीक्षा को घरेलू ईंधन आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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