





जालंधर कैंट (वीकैंड रिपोर्ट)- Illegal Construction in Jalandhar : जालंधर कैंट में कथित अवैध निर्माण के मामले ने कैंटोनमेंट बोर्ड की कार्यप्रणाली और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता विक्रांत गुप्ता का आरोप है कि बार-बार शिकायतें करने और नोटिस जारी होने के बावजूद संबंधित निर्माण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते निर्माण कार्य धीरे-धीरे पूरा हो गया। मामले को लेकर अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोहल्ला नंबर 21, आउटसाइड, जालंधर कैंट निवासी विक्रांत गुप्ता ने संबंधित अधिकारियों को शिकायत देकर प्रॉपर्टी नंबर 96/3 में कथित अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह संपत्ति श्रीमती कमलजीत कौर पत्नी इंद्रजीत से संबंधित है। विक्रांत गुप्ता का कहना है कि उनकी शिकायत के बाद कैंटोनमेंट बोर्ड ने 20 जुलाई 2026 को संबंधित संपत्ति के संबंध में दो नोटिस जारी किए थे। इनमें एक नोटिस निर्माण कार्य रोकने और दूसरा कथित अवैध निर्माण को हटाने के संबंध में था। इसके बावजूद, शिकायतकर्ता के आरोप के अनुसार, निर्माण कार्य जारी रहा और इमारत का निर्माण पूरा हो गया।

कार्रवाई के बावजूद निर्माण पूरा होने का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को कैंटोनमेंट बोर्ड ने उक्त निर्माण के संबंध में कार्रवाई की थी। हालांकि, उनका आरोप है कि इस कार्रवाई के बाद भी निर्माण को रोकने या हटाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत था और इस संबंध में नोटिस भी जारी किए गए थे, तो संबंधित विभाग समय रहते निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं कर सके?
हाई कोर्ट में उठा मामला, पुलिस सुरक्षा का दिया गया हवाला
मामले में कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए विक्रांत गुप्ता ने अपने वकील के माध्यम से पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की। शिकायतकर्ता के अनुसार, सुनवाई के दौरान कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से अदालत को बताया गया कि पुलिस प्रोटेक्शन उपलब्ध नहीं होने के कारण कार्रवाई नहीं की जा सकी। बताया गया है कि सुनवाई के दौरान पुलिस को भी मामले में पक्षकार बनाने और याचिकाकर्ता को संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय दिया गया। हालांकि, इस संबंध में अदालत के आदेशों और दोनों पक्षों के आधिकारिक पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

Illegal Construction in Jalandhar : पुलिस सुरक्षा के तर्क पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल
विक्रांत गुप्ता ने पुलिस सुरक्षा उपलब्ध न होने के तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब 12 अगस्त को निर्माण के संबंध में कार्रवाई की गई थी, तब उनके अनुसार पुलिस की मौजूदगी नहीं थी। ऐसे में बाद की कार्रवाई न होने के लिए पुलिस सुरक्षा की कमी को कारण बताना जांच का विषय है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि संबंधित नोटिसों की प्रतियां सैनिटरी ब्रांच और इंजीनियरिंग ब्रांच को भी भेजी गई थीं। इसलिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित शाखाओं ने क्या कदम उठाए और यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध पाया गया था, तो उसे रोकने के लिए समय पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
पानी का कनेक्शन काटने और जुर्माने का भी दावा
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने 19 जुलाई 2026 को ईमेल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करवाई थी। उनका दावा है कि इसके बाद कैंटोनमेंट बोर्ड ने संबंधित संपत्ति पर लगे अनधिकृत पानी के कनेक्शन को काटने के साथ जुर्माना भी वसूला था। यदि यह कार्रवाई की गई थी, तो संबंधित निर्माण के मामले में आगे क्या कदम उठाए गए, यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
विक्रांत गुप्ता ने संबंधित उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने, कथित अवैध निर्माण के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई करने तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग की है।
बड़ा सवाल: यदि शिकायतों के बाद नोटिस जारी किए गए थे और निर्माण के संबंध में कार्रवाई भी हुई थी, तो क्या प्रशासनिक स्तर पर आगे की निगरानी और कार्रवाई में लापरवाही हुई? क्या संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी रही, या कार्रवाई में किसी अन्य प्रकार की बाधा थी? इन सवालों का जवाब संबंधित रिकॉर्ड, विभागीय जांच और कैंटोनमेंट बोर्ड के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल, शिकायतकर्ता के आरोपों और मामले में सामने आई जानकारी के आधार पर प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। कैंटोनमेंट बोर्ड और संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

नोट: इस समाचार में अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही से संबंधित बातें शिकायतकर्ता के आरोपों पर आधारित हैं। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
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