





धर्म डेस्क (वीकैंड रिपोर्ट)- Karwa Chauth 2026 : हिंदू धर्म में करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। सुबह सरगी खाने से शुरू होने वाला यह व्रत रात में चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद पूरा किया जाता है।
करवा चौथ को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में इस पर्व की खास रौनक देखने को मिलती है। महिलाएं सोलह शृंगार करती हैं, पूजा की थाली सजाती हैं और शाम को एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं। आइए जानते हैं साल 2026 में करवा चौथ कब मनाया जाएगा, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, सरगी कब खानी चाहिए और अलग-अलग शहरों में चांद कब दिखाई देने की संभावना है।
करवा चौथ 2026 कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान महिलाएं व्रत और पूजन करेंगी। करवा चौथ पर पूजा के लिए शाम का समय विशेष माना जाता है। महिलाएं भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता की पूजा करके अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करती हैं।
करवा चौथ 2026 की तिथि और समय
| विवरण | समय |
|---|---|
| करवा चौथ की तारीख | गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 |
| चतुर्थी तिथि आरंभ | 29 अक्टूबर, सुबह 1:06 बजे |
| चतुर्थी तिथि समाप्त | 29 अक्टूबर, रात 10:09 बजे |
| पूजा का शुभ मुहूर्त | शाम 5:38 से 6:56 बजे तक |
| पूजा की अवधि | लगभग 1 घंटा 17 मिनट |
| सरगी का समय | सूर्योदय से पहले, स्थानीय परंपरा के अनुसार |
| दिल्ली में संभावित चंद्रोदय | रात लगभग 8:17 बजे |
स्रोत: द्रिक पंचांग के आधार पर उपलब्ध तिथि और मुहूर्त विवरण। अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय में अंतर हो सकता है।
करवा चौथ 2026: सरगी का समय क्या रहेगा?
करवा चौथ के दिन सरगी का विशेष महत्व होता है। परंपरा के अनुसार, सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं। कई परिवारों में महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाकर व्रत शुरू करती हैं। सरगी खाने का समय परिवार की परंपरा और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार तय किया जाता है। आम तौर पर इसे सुबह लगभग 3:30 से 5:30 बजे के बीच खाने की परंपरा है, लेकिन इसे सभी शहरों के लिए एक समान समय नहीं माना जाना चाहिए।
Karwa Chauth 2026 : करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त
29 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, करवा चौथ पूजा का शुभ समय शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक बताया गया है। इस दौरान महिलाएं पूजा की थाली सजाकर भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता की पूजा कर सकती हैं। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है और चंद्रमा के उदय होने पर अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है। पूजा का मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग से समय की पुष्टि जरूर करें।
करवा चौथ की पूजा विधि: ऐसे करें पूजन
करवा चौथ के दिन पूजा पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार की जाती है। घर में साफ-सफाई करके पूजा की जगह तैयार करें और आवश्यक सामग्री पहले से जुटा लें।
- सरगी ग्रहण करें: सूर्योदय से पहले सरगी खाकर व्रत का संकल्प लें।
- सोलह शृंगार करें: परंपरा के अनुसार महिलाएं साड़ी या अन्य पारंपरिक वस्त्र पहनकर शृंगार करती हैं।
- पूजा स्थल तैयार करें: चौथ माता या माता गौरा की तस्वीर स्थापित करें।
- दीपक जलाएं: भगवान गणेश, शिवजी, माता पार्वती और करवा माता का स्मरण करें।
- पूजा सामग्री अर्पित करें: रोली, अक्षत, फूल, फल और मिठाई चढ़ाएं।
- व्रत कथा सुनें: परिवार की परंपरा के अनुसार करवा चौथ की कथा पढ़ें या सुनें।
- चंद्रमा को अर्घ्य दें: चांद दिखाई देने पर जल अर्पित करके पूजा करें।
- व्रत खोलें: अपनी परंपरा के अनुसार चंद्र दर्शन के बाद व्रत पूरा करें।
करवा चौथ पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
पूजा के समय किसी जरूरी चीज की कमी न हो, इसके लिए सामग्री पहले से तैयार रखना बेहतर है।
- करवा और जल से भरा पात्र
- पूजा की थाली और छलनी
- दीपक, घी और रुई की बाती
- रोली, अक्षत और कुमकुम
- फूल और पूजा के लिए आवश्यक पत्तियां
- फल, मिठाई और नैवेद्य
- चौथ माता या माता गौरा की तस्वीर
- करवा चौथ व्रत कथा की पुस्तक
- चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल
परिवार और क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार पूजा सामग्री में बदलाव हो सकता है।
करवा चौथ पर पढ़ें ये पूजा मंत्र
पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण करने के लिए इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
- श्री गणेश मंत्र: ॐ गणेशाय नमः।
- भगवान शिव मंत्र: ॐ नमः शिवाय।
- माता पार्वती मंत्र: ॐ शिवायै नमः।
- भगवान कार्तिकेय मंत्र: ॐ षण्मुखाय नमः।
- चंद्रदेव मंत्र: ॐ सोमाय नमः।
व्रत का संकल्प लेते समय अपने परिवार की परंपरा के अनुसार संकल्प मंत्र का पाठ भी किया जा सकता है।
Karwa Chauth 2026 : करवा चौथ व्रत के जरूरी नियम
करवा चौथ का व्रत परंपरागत रूप से सूर्योदय से शुरू होकर चंद्र दर्शन और पूजा के बाद पूरा किया जाता है। इस दौरान महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। व्रत रखने वाली महिलाओं को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- व्रत शुरू करने से पहले अपनी पूजा सामग्री और सरगी तैयार कर लें।
- शाम की पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- परिवार की परंपरा के अनुसार करवा चौथ की कथा सुनें।
- चंद्रमा दिखाई देने पर पूजा और अर्घ्य की रस्म पूरी करें।
- मौसम या बादलों के कारण चांद दिखाई न देने पर अपने स्थानीय पुजारी या विश्वसनीय पंचांग से मार्गदर्शन लें।
निर्जला व्रत हर किसी के स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं होता। गर्भवती महिलाओं, बीमार व्यक्तियों या नियमित दवा लेने वालों को अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
करवा चौथ 2026: देश के प्रमुख शहरों में चांद कब निकलेगा?
करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है। चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग हो सकता है, इसलिए दिल्ली का समय पंजाब, महाराष्ट्र या दक्षिण भारत के शहरों पर लागू नहीं किया जा सकता। 29 अक्टूबर 2026 के लिए उपलब्ध शहर-वार पंचांग अनुमानों के अनुसार, प्रमुख शहरों में चांद निकलने का संभावित समय इस प्रकार है।
| शहर | संभावित चंद्रोदय |
|---|---|
| नई दिल्ली | रात 8:17 बजे |
| नोएडा | रात 8:16 बजे |
| गुरुग्राम | रात 8:18 बजे |
| गाजियाबाद | रात 8:17 बजे |
| चंडीगढ़ | रात 8:12 बजे |
| लुधियाना | रात 8:16 बजे |
| अमृतसर | रात 8:18 बजे |
| देहरादून | रात 8:08 बजे |
| हरिद्वार | रात 8:09 बजे |
| शिमला | रात 8:10 बजे |
| लखनऊ | रात 8:06 बजे |
| कानपुर | रात 8:10 बजे |
| वाराणसी | रात 8:02 बजे |
| प्रयागराज | रात 8:06 बजे |
| आगरा | रात 8:18 बजे |
| मथुरा | रात 8:18 बजे |
| जयपुर | रात 8:28 बजे |
| जोधपुर | रात 8:41 बजे |
| अजमेर | रात 8:34 बजे |
| भोपाल | रात 8:31 बजे |
| इंदौर | रात 8:39 बजे |
| उज्जैन | रात 8:38 बजे |
| ग्वालियर | रात 8:15 बजे |
| जबलपुर | रात 8:12 बजे |
| पटना | रात 7:52 बजे |
| भागलपुर | रात 7:46 बजे |
| कोलकाता | रात 7:47 बजे |
| रायपुर | रात 8:18 बजे |
| बिलासपुर | रात 8:07 बजे |
| मुंबई | रात 9:00 बजे |
| नागपुर | रात 8:29 बजे |
| पुणे | रात 8:58 बजे |
| अहमदाबाद | रात 8:52 बजे |
| हैदराबाद | रात 8:41 बजे |
| बेंगलुरु | रात 8:55 बजे |
| चेन्नई | रात 8:44 बजे |
| जम्मू | रात 8:14 बजे |
| श्रीनगर | रात 8:04 बजे |
| मेरठ | रात 8:14 बजे |
| अयोध्या | रात 8:01 बजे |
चंद्रोदय के समय अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। ये संभावित समय हैं, गारंटीशुदा दृश्यता का समय नहीं। पूजा और व्रत खोलने से पहले अपने शहर का स्थानीय पंचांग देख लें।
करवा चौथ व्रत कथा: क्यों रखा जाता है यह व्रत?
करवा चौथ से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें एक कथा सात भाइयों की बहन करवा की भी सुनाई जाती है। कथा के अनुसार, एक व्यापारी की बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा था। दिनभर भूखी-प्यासी बहन को देखकर उसके भाइयों से रहा नहीं गया। उन्होंने दूर पेड़ के पास दीपक जलाकर उसे चांद निकलने का भ्रम पैदा किया। बहन ने इसे चंद्रमा समझकर व्रत खोल लिया। इसके बाद उसे अपने पति के संकट में पड़ने का समाचार मिला। कथा में आगे बताया जाता है कि बहन ने श्रद्धा और नियमपूर्वक करवा माता की पूजा की और अगले वर्ष व्रत पूरा किया। उसकी भक्ति से पति के जीवन में फिर से सुख लौट आया। यह कथा धैर्य, श्रद्धा और संकल्प के महत्व को दर्शाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में करवा चौथ की कथा के अन्य रूप भी प्रचलित हैं।
करवा चौथ आरती
करवा चौथ की पूजा में कई परिवार करवा माता की आरती गाते हैं। स्थानीय परंपरा के अनुसार आरती का पाठ किया जा सकता है। आरती के बाद परिवार के सदस्य माता का स्मरण करते हुए सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
करवा चौथ आरती
ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।
सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी।।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती।।
ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।
होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे।।
ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।
करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे।।
ओम जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।
Karwa Chauth 2026 : करवा चौथ का महत्व
करवा चौथ केवल व्रत रखने का दिन नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते, परिवार की एकजुटता और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जुड़ा त्योहार भी है। इस दिन महिलाएं सजती-संवरती हैं, एक-दूसरे के साथ पूजा करती हैं और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं। इस साल करवा चौथ 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने शहर के अनुसार सरगी, पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय का समय पहले से देख लेना चाहिए, ताकि पूजा विधि-विधान और सुविधा के साथ पूरी की जा सके।
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