





नई दिल्ली (वीकैंड रिपोर्ट)- Bitchat App Removed From India : देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ब्लूटूथ आधारित मैसेजिंग एप्लिकेशन ‘बिटचैट’ (Bitchat) के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। सरकारी निर्देशों के बाद यह ऐप भारत में गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर से हटा दिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार को आशंका थी कि इंटरनेट के बिना काम करने वाली इस तकनीक का दुरुपयोग असामाजिक तत्वों और उपद्रवी समूहों द्वारा किया जा सकता है।
क्या है बिटचैट और क्यों बना चर्चा का विषय?
बिटचैट एक आधुनिक मैसेजिंग ऐप है, जो व्हाट्सएप, टेलीग्राम या अन्य इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म से अलग तरीके से काम करता है। यह ऐप संदेश भेजने और प्राप्त करने के लिए मोबाइल डेटा, वाई-फाई या किसी केंद्रीय सर्वर पर निर्भर नहीं रहता। यह ब्लूटूथ आधारित मेश नेटवर्क (Mesh Network) तकनीक का उपयोग करता है, जिससे आसपास मौजूद डिवाइस सीधे एक-दूसरे से जुड़कर संदेशों का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
इस तकनीक की खासियत यह है कि हर मोबाइल फोन एक छोटे नेटवर्क नोड की तरह काम करता है। जब कई यूजर एक ही क्षेत्र में मौजूद होते हैं, तो उनके फोन आपस में जुड़कर एक चेन बना लेते हैं। यदि संदेश पाने वाला व्यक्ति सीधे ब्लूटूथ रेंज में नहीं है, तो संदेश बीच में मौजूद अन्य यूजर्स के डिवाइस के जरिए आगे बढ़ता रहता है। इस तरह बिना इंटरनेट के भी कम्युनिकेशन संभव हो जाता है।
Bitchat App Removed From India : सरकार की चिंता क्या है?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इंटरनेट से स्वतंत्र होने के कारण इस तरह के प्लेटफॉर्म पर पारंपरिक निगरानी और संचार मॉनिटरिंग करना बेहद मुश्किल हो जाता है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि इंटरनेट बंदी या आपातकालीन परिस्थितियों में ऐसे ऐप्स का इस्तेमाल अफवाह फैलाने, भीड़ जुटाने या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। इसी कारण इसे संभावित सुरक्षा जोखिम के रूप में देखा गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के निर्देश के बाद एप्पल और गूगल ने भारत में इस ऐप की उपलब्धता समाप्त कर दी। ऐप के डेवलपर जैक डोर्सी ने भी सार्वजनिक रूप से दावा किया कि भारत सरकार के निर्देश के बाद ऐप को हटाया गया।
सुरक्षा एजेंसियां रख रही हैं नजर
हालांकि ऐप को स्टोर्स से हटाया जा चुका है, लेकिन इसके तकनीकी और कानूनी पहलुओं को लेकर बहस जारी है। सुरक्षा एजेंसियां इस तरह की विकेंद्रीकृत (Decentralized) तकनीकों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी संभावित दुरुपयोग को समय रहते रोका जा सके। बिटचैट को हटाए जाने के बाद डिजिटल अधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर चर्चा भी तेज हो गई है। एक ओर सरकार सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता बता रही है, वहीं कुछ डिजिटल अधिकार समूह इस कदम पर सवाल भी उठा रहे हैं।
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