

नई दिल्ली (वीकैंड रिपोर्ट)- Supreme Court on Child Kidnapping : देश में बच्चों के अपहरण और मानव तस्करी के बढ़ते मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। इस मुद्दे पर दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिका अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर की गई है, जिसमें बच्चों के अपहरण से जुड़े मामलों में कानून को और अधिक सख्त बनाने की मांग की गई है।
याचिका में दावा किया गया है कि देश में अवैध गोद लेने, अंतरराज्यीय बाल तस्करी और बच्चों के शोषण से जुड़े संगठित गिरोह सक्रिय हैं। आरोप है कि कई मामलों में बच्चों का अपहरण कर उन्हें गैर-कानूनी गतिविधियों, मानव तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों में इस्तेमाल किया जाता है।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए गंभीर सवाल
याचिका में कहा गया है कि कई बार लापता या अपहृत बच्चों के मामलों में पुलिस द्वारा तुरंत एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, जिससे जांच में देरी होती है और अपराधियों को फायदा मिलता है। धीमी जांच और वर्षों तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया के कारण ऐसे गिरोहों का नेटवर्क मजबूत होता जा रहा है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि बच्चों के अपहरण से जुड़े मामलों की जांच वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कराई जाए और ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाए।
Supreme Court on Child Kidnapping : सुप्रीम कोर्ट में रखी गईं अहम मांगें
याचिका में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें—
- बच्चों के अपहरण की जांच ACP या SHO स्तर के अधिकारी करें।
- अपहरण मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन हो।
- मामलों का निपटारा एक वर्ष के भीतर किया जाए।
- दोषियों और उनके सहयोगियों की संपत्तियों को जब्त करने का प्रावधान बनाया जाए।
- बच्चों की तस्करी और अपहरण के मामलों में सख्त दंड सुनिश्चित किया जाए।
चौंकाने वाले आंकड़ों का हवाला
याचिका में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, बिहार में वर्ष 2013 से हर साल औसतन लगभग 15 हजार लापता बच्चों के मामले दर्ज किए जाते हैं। इनमें से बड़ी संख्या बच्चों की होती है और करीब आधे मामलों में ही बच्चों का पता चल पाता है। एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि मानव तस्करी के मामलों में ओडिशा, बिहार, तेलंगाना और महाराष्ट्र प्रमुख राज्यों में शामिल हैं। वहीं नाबालिग लड़कियों की तस्करी के मामलों में राजस्थान शीर्ष पर बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कई बच्चों को भीख मंगवाने, बाल मजदूरी, यौन शोषण और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों में धकेला जाता है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
नवजात बच्चों की तस्करी का भी हुआ उल्लेख
याचिका में जून 2026 में सामने आए एक मामले का भी जिक्र किया गया है, जिसमें दिल्ली पुलिस ने 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि कथित नेटवर्क दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों में सक्रिय था। आरोप था कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से नवजात बच्चों को अवैध तरीके से हासिल कर उन्हें लाखों रुपये में बेचा जाता था। इस मामले ने देशभर में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
Supreme Court on Child Kidnapping : बच्चों की सुरक्षा पर सख्त कानून की मांग
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि बच्चों के अपहरण और तस्करी से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई, तकनीकी निगरानी और सख्त सजा बेहद जरूरी है। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र और राज्य सरकारें बच्चों की सुरक्षा को लेकर क्या जवाब देती हैं और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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