

काठमांडू (वीकैंड रिपोर्ट)- Nepal Flash Flood : हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल सरकार ने विदेशी सहायता को लेकर अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। पहले विदेशी बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों में प्रवेश की अनुमति देने से इनकार करने वाला नेपाल अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमों को सीमित तकनीकी सहायता प्रदान करने की अनुमति देगा। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक लापता हैं और कई देशों ने अपने नागरिकों की तलाश के लिए सहयोग की पेशकश की है।
600 से अधिक मौतें, 2 हजार लोग अब भी लापता
भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार शनिवार सुबह तक 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में सबसे अधिक संख्या भारतीय नागरिकों की बताई जा रही है। इसके अलावा चीन, अमेरिका, यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के कई नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पाया है।
विदेशी विशेषज्ञ करेंगे विशेष अभियानों में मदद
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि सामान्य सर्च और रेस्क्यू अभियान के लिए नेपाल अपने संसाधनों पर निर्भर है, लेकिन कुछ विशेष तकनीकी कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता की आवश्यकता है। सरकार द्वारा गठित अंतर-मंत्रालयी पैनल ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया से विशेषज्ञ सहायता लेने को मंजूरी दे दी है। ये टीमें टनल रेस्क्यू, डीएनए विश्लेषण, फोरेंसिक जांच और मृतकों की पहचान जैसे विशेष अभियानों में सहयोग करेंगी।
हाइड्रोपावर परियोजना में फंसे 576 कर्मचारियों की तलाश जारी
सबसे बड़ी चिंता 216 मेगावाट क्षमता वाले अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर बनी हुई है। परियोजना स्थल पर कार्यरत 576 कर्मचारियों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों के अनुसार भूस्खलन, टूटी सड़कें और संचार व्यवस्था ठप होने के कारण राहत कार्यों में लगातार बाधाएं आ रही हैं।
Nepal Flash Flood : भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
भारत ने नेपाल को टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों, मेडिकल टीमों और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की सहायता देने की पेशकश की है। इसके अलावा भारत की ओर से जनरेटर, भोजन, पेयजल शुद्धिकरण गोलियां और अन्य राहत सामग्री भी भेजी गई है। दक्षिण कोरिया ने भी अपने लापता नागरिकों की तलाश के लिए विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू कर दी है। विदेशी विशेषज्ञ मुख्य रूप से रसुवा और नुवाकोट क्षेत्रों में चल रहे सुरंग बचाव अभियानों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
दुर्गम इलाकों में राहत कार्य बना चुनौती
नेपाल के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में बाढ़ तथा भूस्खलन के कारण राहत एवं बचाव कार्य बेहद कठिन हो गए हैं। सरकार निजी हेलीकॉप्टरों की मदद लेने पर भी विचार कर रही है, लेकिन सीमित लैंडिंग क्षेत्रों और खराब मौसम के कारण अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
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