
जालंधर, 8 जून 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Khet Bachao Abhiyan : पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के निदेशक प्रसार शिक्षा के नेतृत्व में कृषि विज्ञान केंद्र (के.वी.के.), जालंधर और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, जालंधर द्वारा संयुक्त रूप से ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत इनपुट डीलरों और सहकारी सभाओं के प्रतिनिधियों के लिए एक जागरूकता प्रोग्राम आयोजित किया गया। इस प्रोग्राम का उद्देश्य इनपुट डीलरों और सहकारी सभाओं को टिकाऊ खेतीबाड़ी, फसली विविधता तथा वैज्ञानिक खेती तकनीकों के बारे में जागरूक करना था, ताकि वह किसानों तक सही जानकारी पहुंचा सकें।
प्रोग्राम के दौरान मुख्य कृषि अधिकारी, जालंधर डा.जसविंदर सिंह ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इनपुट डीलर और सहकारी सभाएं किसानों तक कृषि की नई सिफारिशें पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने फसली विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को समय की मांग बताया।
एसोसिएट डायरेक्टर (ट्रेनिंग), के.वी.के. जालंधर डा. संजीव कुमार कटारिया ने पंजाब की खेती के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की और टिकाऊ तथा मौसम अनुकूल खेती तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इनपुट डीलरों को कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच एक प्रभावी कड़ी के रूप में काम करने के लिए प्रेरित किया। एसोसिएट प्रोफेसर (बागबानी), के.वी.के. जालंधर डॉ. बलवीर कौर ने बागबानी फसलों के माध्यम से फसली विविधता के अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फल और सब्जियों की खेती किसानों की आय बढ़ाने का एक लाभकारी विकल्प है।

Khet Bachao Abhiyan : कृषि विकास अधिकारी (बीज) डा. अनीश चंद्र ने मानक बीज के महत्व, बीज प्रमाणीकरण और सिफारिश की गई किस्मों के उपयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों को प्रमाणित बीज उपयोग करने के लिए प्रेरित करने की अपील की। सहायक प्रोफेसर (एग्रोनॉमी), के.वी.के. जालंधर डा. प्रभजीत कौर ने फसली विविधता, संतुलित खाद प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ उत्पादकता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।
सहायक प्रोफेसर (पौधा रोग विज्ञान), के.वी.के. जालंधर डा. हरविंदर सिंह ने फसलों में रोगों की पहचान, रोकथाम और एकीकृत रोग प्रबंधन (Integrated Disease Management) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कीटनाशकों के उचित और सिफारिश के अनुसार उपयोग की महत्वता पर जोर दिया। प्रोग्राम में बड़ी संख्या में इनपुट डीलरों और सहकारी सभाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और कृषि से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया। अंत में सभी उपस्थित सदस्यों से ‘खेत बचाओ अभियान’ के उद्देश्यों को सफल बनाने और पंजाब की खेती को और अधिक टिकाऊ तथा लाभकारी बनाने के लिए अपना योगदान देने की अपील की गई।
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