
बीजिंग (वीकैंड रिपोर्ट)- Super Cold Air Battery : चीन ने ऊर्जा भंडारण तकनीक के क्षेत्र में एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। किंगहाई प्रांत के गोलमुड शहर के बाहरी इलाके में, गोबी रेगिस्तान के बीच दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विड एयर एनर्जी स्टोरेज सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना को तकनीकी जगत में ‘सुपर कोल्ड एयर बैटरी’ के नाम से जाना जा रहा है। अपने विशाल आकार के साथ-साथ यह प्लांट अपनी अनोखी कार्यप्रणाली के कारण भी चर्चा में है। इसमें हवा को अत्यधिक दबाव में कंप्रेस कर माइनस 194 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है, जिससे वह तरल रूप में बदल जाती है। भविष्य में बिजली की मांग बढ़ने पर इसी लिक्विड हवा की मदद से टरबाइन चलाकर बिजली उत्पन्न की जाएगी।
‘इंटरेस्टिंग इंजीनियरिंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस बड़े ऊर्जा भंडारण संयंत्र को चाइना ग्रीन डेवलपमेंट इन्वेस्टमेंट ग्रुप ने चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के टेक्निकल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स एंड केमिस्ट्री के सहयोग से तैयार किया है। यह प्लांट जल्द ही संचालन में आ जाएगा। इसकी क्षमता काफी बड़ी है—यह एक बार में करीब 6 लाख किलोवॉट-घंटा बिजली सप्लाई कर सकता है और लगातार 10 घंटे तक काम करने में सक्षम है। अनुमान है कि यह संयंत्र सालाना लगभग 18 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन करेगा, जिससे करीब 30 हजार घरों की ऊर्जा जरूरतें पूरी की जा सकेंगी।
Super Cold Air Battery : इस प्लांट की तकनीक वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है। सबसे पहले बिजली की मदद से हवा को शुद्ध किया जाता है, फिर उसे दबाकर और अत्यधिक ठंडा कर लिक्विड रूप में बड़े टैंकों में संग्रहित किया जाता है। जब बिजली की जरूरत होती है, तो इस लिक्विड हवा को दोबारा गर्म किया जाता है। तापमान बढ़ते ही हवा तेजी से गैस में बदलती है और फैलती है, जिससे टरबाइन घूमते हैं और बिजली पैदा होती है। इस पूरे सिस्टम को गोबी रेगिस्तान में स्थित 2.5 लाख किलोवॉट के सोलर फार्म से जोड़ा गया है, ताकि अक्षय ऊर्जा का अधिकतम उपयोग हो सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के ऊर्जा भंडारण सिस्टम की जरूरत इसलिए भी थी क्योंकि सोलर और विंड एनर्जी मौसम पर निर्भर करती हैं और इनमें लगातार उतार-चढ़ाव बना रहता है। इससे पावर ग्रिड की स्थिरता प्रभावित होती है। शोधकर्ता वांग जुनजी का कहना है कि यह प्लांट अतिरिक्त बिजली को स्टोर करके रखेगा और जरूरत पड़ने पर ग्रिड को सप्लाई देगा। इससे बिजली आपूर्ति में संतुलन बना रहेगा। माना जा रहा है कि यह तकनीक आने वाले समय में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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