
जालंधर ( वीकैंड रिपोर्ट) HMV celebrated Vrikshabandhan and Rakhi : प्राचार्या प्रो. डॉ. अजय सरीन के दूरदर्शी नेतृत्व में, हंस राज महिला महाविद्यालय ने प्रेरणा पुंज में नेशनल एडू ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सहयोग से वृक्षबंधन और राखी सखी का उत्सव मनाया।
HMV celebrated Vrikshabandhan and Rakhi : इस उत्सव में रक्षाबंधन के पवित्र बंधन को पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और संस्थागत प्रतिबद्धता के विषयों के साथ खूबसूरती से मिश्रित किया गया। यह कार्यक्रम “कर्तव्य बंधन” के भावपूर्ण विषय पर केंद्रित था, जो हमारे संस्थान के प्रति हमारे कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को दर्शाता है। छात्राओं और शिक्षकों ने सद्भाव, स्थिरता और आपसी सम्मान के मूल्यों को बनाए रखने का संकल्प लिया।

“राखी सखी” की एक अनूठी पहल में, छात्राओं ने एक-दूसरे को राखी बाँधी, जो बहनचारे की ताकत, साझा सफ़र और सहयोग के वादे का प्रतीक है। प्राचार्या डॉ. अजय सरीन ने पेड़ों को राखी बाँधी, प्रकृति के साथ हमारे बंधन को मज़बूत किया, और प्रेम और ज़िम्मेदारी में निहित नेतृत्व को दर्शाते हुए, शिक्षकों और छात्राओं तक भी यह भावना पहुँचाई।
HMV celebrated Vrikshabandhan and Rakhi : इस अवसर पर बोलते हुए, डॉ सरीन ने इस बात पर जोर दिया कि “राखी सिर्फ एक धागा नहीं है, यह एक-दूसरे की रक्षा, पोषण और उत्थान के लिए हमारी आजीवन प्रतिबद्धता का अनुस्मारक है और हमारे आसपास की दुनिया की रक्षा करती है।
डॉ राखी मेहता के रचनात्मक मार्गदर्शन में डिजाइन विभाग ने पेड़ों के लिए सुंदर पर्यावरण के अनुकूल राखियां तैयार कीं, जिससे इस आयोजन में एक अनूठा कलात्मक आयाम जुड़ गया। डॉ उर्वशी ने इस अवसर की भावनात्मक और पारिस्थितिक भावना को पकड़ते हुए एक भावपूर्ण कविता सुनाई। डॉ नवरूप, डॉ सीमा मारवाह, डॉ वीना अरोड़ा, डॉ अंजना भाटिया, डॉ गगन, डॉ साक्षी, श्री रवि और स्टाफ सदस्य श्री पंकज, श्री रवि मैनी और श्रीमती सीमा जोशी सहित सम्मानित संकाय सदस्यों ने उत्साह से भाग लिया।

HMV celebrated Vrikshabandhan and Rakhi : इस कार्यक्रम में इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) और जूलॉजी विभाग की सक्रिय भागीदारी भी देखी गई कॉलेज ने इस पहल का समर्थन करने और भावनात्मक व पर्यावरणीय जुड़ाव की संस्कृति को पोषित करने के लिए नेशनल एडु ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सीईओ श्री समर्थ शर्मा का हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम ने खूबसूरती से दर्शाया कि सच्चे बंधन केवल धागों से नहीं, बल्कि मूल्यों, देखभाल और एक-दूसरे के प्रति, पर्यावरण के प्रति और उस संस्थान के प्रति सामूहिक ज़िम्मेदारी से बनते हैं जिसे हम संजोते हैं।
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