
वॉशिंगटन, 12 अप्रैल 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Iran Crisis Impact : ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ नजर आने लगा है। Ajay Banga ने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा सीजफायर टूटता है, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं और इसका असर लंबे समय तक दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बना रहेगा।
ग्रोथ पर पड़ेगा असर
World Bank के अनुसार, अगर सीजफायर जारी रहता है तो भी वैश्विक विकास दर में 0.3% से 0.4% तक गिरावट आ सकती है। वहीं, संघर्ष बढ़ने की स्थिति में यह गिरावट 1% तक पहुंच सकती है, जिससे व्यापार और वित्तीय बाजार प्रभावित होंगे।
महंगाई बढ़ने की आशंका
बंगा ने कहा कि मौजूदा हालात में महंगाई पर भी दबाव बढ़ेगा। सीजफायर रहने पर महंगाई 0.2% से 0.3% तक बढ़ सकती है, जबकि संघर्ष तेज होने पर यह 0.9% तक पहुंच सकती है। विकासशील देशों के लिए यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ऊर्जा संकट बनेगा बड़ी चुनौती
ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह संकट और गहरा सकता है। छोटे द्वीपीय देशों के लिए इमरजेंसी फंडिंग की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल और गैस की सप्लाई में बाधा से वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ेगा।
Iran Crisis Impact : सरकारों को सलाह
बंगा ने सरकारों को चेताया कि वे अस्थिर ऊर्जा सब्सिडी से बचें और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने पर जोर दें। उन्होंने परमाणु, सौर, पवन और जलविद्युत जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों में निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई।
नाइजीरिया मॉडल का जिक्र
उन्होंने नाइजीरिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 20 अरब डॉलर की रिफाइनरी परियोजना ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत किया है और निर्यात क्षमता भी बढ़ाई है।यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब मिडिल ईस्ट में तनाव बना हुआ है और वैश्विक बाजार इसकी दिशा पर नजर रखे हुए हैं।
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