
नई दिल्ली (वीकैंड रिपोर्ट)- Adult Content Creators US Visa : अब तक अमेरिकी वीज़ा नीति में सबसे ज्यादा चर्चा H-1B वीज़ा को लेकर होती रही—कभी फीस बढ़ने पर बहस, तो कभी इंटरव्यू और अप्रूवल में देरी को लेकर। लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। अमेरिका में फोकस तेजी से O-1 वीज़ा पर शिफ्ट हो गया है, और हैरानी की बात यह है कि इस श्रेणी में इंजीनियरों या शोधकर्ताओं से ज्यादा एडल्ट फिल्ममेकर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को मंज़ूरी मिल रही है।
क्या है O-1 वीज़ा और क्यों हो रही है चर्चा?
O-1 वीज़ा को आमतौर पर “जीनियस वीज़ा” कहा जाता है। यह उन लोगों को दिया जाता है जिनके पास विज्ञान, कला, शिक्षा, खेल या व्यापार जैसे क्षेत्रों में असाधारण प्रतिभा मानी जाती है। लेकिन हाल के वर्षों में इस वीज़ा का इस्तेमाल एक अलग ही दिशा में बढ़ता दिख रहा है।
OnlyFans और एडल्ट इंडस्ट्री को मिल रही बढ़त
ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, O-1 वीज़ा पाने वालों में बड़ी संख्या उन लोगों की है जो OnlyFans जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं। ये कंटेंट क्रिएटर्स अपनी लोकप्रियता, फॉलोअर्स की संख्या, ऑनलाइन कमाई और मीडिया कवरेज को अपनी “असाधारण प्रतिभा” के प्रमाण के रूप में पेश कर रहे हैं।
Adult Content Creators US Visa : फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि 2014 से 2024 के बीच O-1 वीज़ा जारी करने में करीब 50% की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें डिजिटल और एडल्ट कंटेंट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।
डिजिटल पहचान बन रही है नई योग्यता
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि O-1 वीज़ा में “कला” की परिभाषा को लेकर कोई स्पष्ट सीमा तय नहीं है। इसी वजह से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बनाई गई पहचान—जैसे करोड़ों व्यूज़, लाखों फॉलोअर्स और बड़ी कमाई—अब वीज़ा अप्रूवल का मजबूत आधार बन रही है।
H-1B का विकल्प बनता O-1 वीज़ा
जहां H-1B वीज़ा तकनीकी पेशेवरों के लिए कड़े नियमों और सीमित कोटा से बंधा है, वहीं O-1 वीज़ा में ऐसी पाबंदियां नहीं हैं। यही कारण है कि अमेरिका के बाहर रहने वाले कई एडल्ट मॉडल और फिल्ममेकर, जो अमेरिकी प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करते हैं, H-1B की बजाय O-1 वीज़ा को अपना रहे हैं—और उनके आवेदन अपेक्षाकृत आसानी से पास हो रहे हैं।
नीति पर उठते सवाल
Adult Content Creators US Visa : इस बदलते ट्रेंड ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है—क्या अमेरिका की वीज़ा नीति अब पारंपरिक टैलेंट से हटकर डिजिटल पॉपुलैरिटी को ज्यादा तरजीह दे रही है? और क्या इंजीनियरों, छात्रों व शोधकर्ताओं के लिए रास्ता पहले से ज्यादा कठिन होता जा रहा है? अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में यह बदलाव आने वाले समय में और गहराने की संभावना जता रहा है।
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