
जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट) Rakshabandhan Festival : रक्षा बंधन का त्योहार सिर्फ भाई और बहन के लिए नहीं है, यह परिवार-समाज के साथ-साथ प्रकृति से प्रेम और रक्षा का बोध भी कहलाता है। भारत में यह त्योहार धूम-धाम से मनाया जाता है। रक्षा बंधन की अलग-अलग परंपराओं की बात करें तो मारवाड़ी समाज में यह त्योहार नौ दिन मनाया जाता है। पहले घर की चौखट की पूजा की जाती है। इसमें खाने का सामान जैसे कि खीर, पूड़ी, मौली और दूबी दरवाजे पर रखी जाती है।
बहनें पहले चौखट की पूजा करती हैं। फिर अपने भाई को राखी बांधती हैं और भाई की पूजा करती हैं। फिर अगले आठ दिन रिश्तेदारों के घर जाकर राखी बांधती हैं। नौवें दिन गुग्गा जी (घोड़ा जैसा मिट्टी का जिस पर भगवान को बैठाया जाता है) बनाते हैं। उसके बाद सारी राखियां उतार गुग्गा जी के चरणों में रख दी जाती है।
पेड़ को बांधी जा रही हैं राखी आए जानीए।
-कुछ जगह पर भाई के साथ-साथ पेड़ों को भी राखी बांधी जाती है। यह पेड़ों के प्रति सम्मान और रक्षा करने की भावना दिलाता है।
-यह बंधन सिर्फ भाई-बहन तक सीमित नहीं है। इसके इलावा प्रकृति के प्रति भी प्रेम की ओर जिम्मेदारी का एहसास करवाता है।
-यह रिश्ता भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत बनाता है।
-यह त्योहार परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ लाता हैं और प्रेम करने की भावना जगाता है।
-पेड़ को राखी बांधने के बाद बहनें पेड़ों की रक्षा और समृद्धि की प्रार्थना करती है।
-पेड़-पौधे हमें जीवन दान देते हैं।
-पेड़-पौधों की वजह से पर्यावरण संरक्षित रहता है।
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