
जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट) Mangala Gauri Vrat : सावन मास के हर मंगलवार को मंगला गाैरी व्रत रखा जाता है। मान्यता है इस व्रत के प्रभाव से व्रती को माता गौरी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इससे उनका वैवाहिक जीवन खुशहाल बनता है। इस दिन भगवान शिव और पार्वती की पूजा की जाती है। यह व्रत आम तोर पर औंरतें रखती हैं। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं द्वारा रखा जाता है।

दूसरा मंगला गाैरी व्रत 22 और तीसरा मंगला गौरी व्रत 29 जुलाई को है। यह व्रत कुंवारी लड़कियां भी अपना मन-पंसद वर पाने के लिए व्रत रखती हैं। सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें। अब एक वेदी या चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और भगवान शिव और माता गौरी की प्रतिमा स्थापित करें। व्रत का संकल्प लें। माता पार्वती को 16 श्रृंगार, सूखे मेवे, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची व मिठाई आदि अर्पित करें।
Nag Panchami : उसी दिन नाग पंचमी भी है। हर वर्ष यह पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है कुछ जगहों पर सावन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से सभी तरह के दुखों से मुक्ति मिलती है और कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष भी दूर होता है।

नाग पंचमी पर शिवालयों में जलाभिषेक करने के साथ श्रद्धालु शिव के जयकारे लगाएंगे। पर्व के मौके पर शिव योग के साथ रवि योग का संयोग बना रहेगा। महिलाएं मां पार्वती का विधि-विधान के साथ पूजन करेंगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन माह की पंचमी तिथि नाग देवता को समर्पित है। इस दिन सर्पों के 12 स्वरूपों अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, कर्कोटक, अश्व, तक्षक आदि की पूजा होती है।
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