
जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)- Hawan at Maa Baglamukhi Dham : मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित्त सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया। सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।

सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन-यज्ञ के पावन अवसर पर प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने माँ भक्तों को अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचनों से मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने अपने संदेश की शुरुआत रामचरितमानस की इस अमर चौपाई ‘‘जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी’’ से करते हुए कहा कि यह केवल काव्य-पंक्ति नहीं, बल्कि मानव मन और अध्यात्म का गहरा सिद्धांत है।

नवजीत भारद्वाज जी ने समझाया कि इस चौपाई का सीधा अर्थ है—जिसकी जैसी भावना होती है, उसे भगवान का स्वरूप भी वैसा ही दिखाई देता है। ईश्वर एक हैं, परंतु देखने वालों की दृष्टि अलग-अलग होती है। जब भगवान श्रीराम जनकपुरी पहुंचे, तब किसी ने उन्हें पराक्रमी योद्धा के रूप में देखा, किसी ने सुंदर राजकुमार के रूप में; संतों ने उनमें परम ब्रह्म का साक्षात्कार किया और माताओं ने उन्हें पुत्रवत स्नेह से अपनाया। उस समय भगवान का स्वरूप नहीं बदला—बदली तो केवल देखने वालों की भावना। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी का संदेश अत्यंत स्पष्ट है—ईश्वर को पाने के लिए बाहरी आडंबरों से अधिक आवश्यक है अंतर्मन की शुद्धि। भगवान को देखने की दृष्टि बाहर नहीं, भीतर से जन्म लेती है। जब मन निर्मल होता है, तब हर दिशा में ईश्वर का प्रकाश दिखाई देता है।

Hawan at Maa Baglamukhi Dham : नवजीत भारद्वाज जी ने आगे कहा कि भाव प्रधान है। पूजा-पाठ का अपना महत्व है, परंतु उससे भी अधिक मूल्यवान है सच्ची श्रद्धा। जब हम सच्ची भावना से दूसरों में अच्छाई देखने लगते हैं, तो हमारे संबंध मधुर हो जाते हैं। यदि भावना निर्मल हो, तो हर कण में भगवान का अनुभव संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि यह चौपाई हमें याद दिलाती है कि दुनिया वैसी नहीं है जैसी दिखती है, बल्कि वैसी है जैसी हमारी सोच है। यदि हम हर परिस्थिति में सकारात्मकता खोजें, तो कठिन समय भी साधना का अवसर बन सकता है।

भगवान को बदलने की आवश्यकता नहीं, बल्कि अपनी भावना को शुद्ध करने की आवश्यकता है। अंत में उन्होंने माँ भक्तों को संदेश दिया कि जब हृदय में प्रेम, श्रद्धा और अटूट विश्वास जागृत होगा, तब प्रभु का साक्षात् अनुभव भी उसी रूप में होगा। सच ही कहा गया है दृष्टि बदले तो सृष्टि बदले।

इस अवसर पर प्रदीप धीर,राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,कमल भैंरों,सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा,प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,विवेक,,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा, जगदीश डोगरा, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा,,परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश,गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी,लवली, लक्की, मोहित , विशाल,रवि भल्ला,जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर, प्रिंस कुमार,दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ, नरेश,दिक्षित, अनिल सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।

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