

संगरूर (वीकैंड रिपोर्ट)- Punjab Bus Employees Strike : पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कांट्रैक्ट कर्मचारियों ने एक बार फिर अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पंजाब रोडवेज, पनबस/पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर यूनियन के संगरूर डिपो अध्यक्ष हरप्रीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि पिछले लगभग चार वर्षों में सरकार के साथ 59 बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कर्मचारियों को केवल आश्वासन ही मिले हैं, कोई ठोस समाधान नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारी व्यवस्था के कारण विभाग और कर्मचारियों का लगातार आर्थिक शोषण हो रहा है तथा जीएसटी कमीशन और भ्रष्टाचार के जरिए करोड़ों रुपये की लूट की जा रही है।
ईपीएफ और ईएसआई को लेकर भी उठाए सवाल
यूनियन नेताओं का कहना है कि कई बार लिखित शिकायतें और सबूत देने के बावजूद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों का ईपीएफ और ईएसआई का पैसा भी नियमित रूप से जमा नहीं कराया जा रहा, जिससे कर्मचारियों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है। हरप्रीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा पहले ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त करने की बात कही गई थी, लेकिन इसके बावजूद नए ठेकेदारों की नियुक्तियां जारी हैं।
परिवहन मंत्री पर टालमटोल का आरोप
यूनियन नेताओं ने राज्य के नए परिवहन मंत्री पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि पिछले तीन महीनों से हर बैठक में 10-10 दिन का समय मांगकर केवल कर्मचारियों को आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन मांगों के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
1200 करोड़ रुपये जारी न करने का आरोप
इस मौके पर यूनियन के उपाध्यक्ष रमनदीप सिंह, लखविंदर सिंह बिट्टू और सहायक सचिव गुरजीत सिंह ने कहा कि सरकार महिलाओं को दी जा रही मुफ्त बस यात्रा योजना के तहत रोडवेज विभाग का लगभग 1200 करोड़ रुपये का बकाया जारी नहीं कर रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों को नियमित करने से भी बच रही है, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है।
Punjab Bus Employees Strike : किलोमीटर स्कीम की बसों को लेकर भी नाराजगी
उपाध्यक्ष परमिंदर सिंह जस्सर, गुरदीप सिंह और गुरप्रीत सिंह ने कहा कि सरकारी बेड़े में नई बसें शामिल करने के बजाय किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनका आरोप है कि सरकार इस कदम के जरिए जनता के बीच झूठी वाहवाही लूटने की कोशिश कर रही है।
17 सितंबर की बैठक पर टिकी निगाहें
यूनियन नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 17 सितंबर को होने वाली बैठक में उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो 22 सितंबर से पूरे पंजाब में चक्का जाम आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सर्विस रूल्स के तहत कांट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का करना, आउटसोर्स कर्मचारियों को कांट्रैक्ट प्रणाली में लाना, ‘समान काम-समान वेतन’ लागू करना और कर्मचारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेना शामिल है। यूनियन ने कहा कि यदि आंदोलन की नौबत आती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पंजाब सरकार और परिवहन विभाग के प्रबंधन की होगी।
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