
जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)- Police negligence on Bullet pataka bikes : शहर में इन दिनों मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बुलेट बाइकों का तेज शोर लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। ‘बुलेट के पटाखे’ कहे जाने वाले तेज धमाकेदार आवाज वाले साइलेंसर से न सिर्फ ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को भी भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कुछ युवक अपनी बाइकों के साइलेंसर बदलवा कर जानबूझकर तेज आवाज निकालते हैं, जिससे रात के समय भी शांति भंग होती है। स्कूल, अस्पताल और रिहायशी इलाकों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
नियमों के बावजूद खुलेआम उल्लंघन
मोटर व्हीकल नियमों के तहत वाहन के साइलेंसर में अवैध बदलाव करना कानूनन अपराध है। इसके बावजूद शहर में मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइकों की संख्या बढ़ती जा रही है। लोगों का आरोप है कि इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे ऐसे युवकों के हौसले बुलंद हैं।
Police negligence on Bullet pataka bikes : पुलिस कार्रवाई की मांग
नागरिकों ने ट्रैफिक पुलिस से मांग की है कि ऐसे वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए और मौके पर चालान काटे जाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार तेज ध्वनि से मानसिक तनाव, नींद में बाधा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
जागरूकता भी जरूरी
विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ जुर्माना ही समाधान नहीं है, बल्कि युवाओं में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। वाहन का मॉडिफिकेशन स्टाइल का प्रतीक नहीं, बल्कि कानून उल्लंघन और सामाजिक परेशानी का कारण बन सकता है। शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ध्वनि प्रदूषण की यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
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