
नई दिल्ली (वीकैंड रिपोर्ट)- Online Sex Racket : तकनीक ने जहां दुनिया को सुविधाएं दी हैं, वहीं डिजिटल अंधेरे का एक खतरनाक चेहरा भी सामने आया है। हाल ही में स्वतंत्र दासता-विरोधी आयुक्त (IASC) की रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर सनसनी फैला दी है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इंटरनेट पर महिलाओं और नाबालिग बच्चियों को ‘प्रोडक्ट’ की तरह बेचने का संगठित नेटवर्क सक्रिय है। तथाकथित “पिम्पिंग वेबसाइट्स” आधुनिक गुलामी का डिजिटल अड्डा बन चुकी हैं।
60,000 से ज्यादा संदिग्ध विज्ञापनों का जाल
कमिश्नर एलेनोर लियोन की अगुवाई में हुई जांच में 12 प्रमुख वेबसाइट्स पर लगभग 63,000 विज्ञापनों की पड़ताल की गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि हर 10 में से 6 विज्ञापनों में मानव तस्करी और यौन शोषण के स्पष्ट संकेत मिले।
रिपोर्ट के मुताबिक केवल एक महीने में इन प्लेटफॉर्म्स पर 4 करोड़ से ज्यादा विजिट्स दर्ज की गईं, जो इस अवैध कारोबार के विशाल नेटवर्क को दर्शाता है।
‘सुपरमार्केट’ जैसा अमानवीय व्यवहार
मानव तस्करी से बचकर निकली पीड़िता मिया डे फाओइट ने इसे “आधुनिक गुलाम बाजार” करार दिया। उसके अनुसार, इन वेबसाइट्स पर ग्राहक उम्र, नस्ल और दिखावट के आधार पर महिलाओं को चुनते हैं, मानो वे कोई वस्तु खरीद रहे हों।
Online Sex Racket : पीड़िताओं की दर्दनाक आपबीती
पहचान के लिए टैटू: एक महिला ने बताया कि उसने अपने शरीर पर पहचान के लिए टैटू बनवाया ताकि अगर उसकी हत्या हो जाए तो शव की पहचान हो सके।
हिंसा और धमकी: ग्राहकों से मिलने से इनकार करने पर महिलाओं को बलात्कार और जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं।
बिचौलियों का नियंत्रण: अपराधी महिलाओं के नाम पर ग्राहकों से चैट कर सौदा तय करते हैं और पूरा मुनाफा खुद रख लेते हैं, जबकि पीड़िताएं मानसिक और आर्थिक शोषण झेलती हैं।
सरकार का सख्त रुख
रिपोर्ट सामने आने के बाद ब्रिटिश सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। संसद में ऐसे कानून प्रस्तावित किए जा रहे हैं, जिनसे अदालतों को इन अवैध वेबसाइट्स को तुरंत निलंबित करने का अधिकार मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया है कि टेक कंपनियों को आपत्तिजनक या बिना सहमति साझा की गई तस्वीरों को 48 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। साथ ही, इन प्लेटफॉर्म्स पर Age Verification System लागू करने की मांग भी तेज हो गई है ताकि नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
Online Sex Racket : सावधानी ही बचाव
मानव तस्करी से पीड़ित महिलाओं की सहायता करने वाली संस्था TARA का कहना है कि अपराधी अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाते हैं। इंटरनेट पर दिखने वाले संदिग्ध “एस्कॉर्ट सर्विस” या “मसाज पार्लर” विज्ञापनों के पीछे अक्सर संगठित अपराध छिपा होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी निगरानी, सख्त कानून और जागरूकता ही इस आधुनिक गुलामी के नेटवर्क को तोड़ने का रास्ता है।
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