
नई दिल्ली (वीकैंड रिपोर्ट)- Budget 2026-27 : वित्त मंत्री ने संसद में वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करते हुए ‘युवा शक्ति’ को विकास की धुरी बताया है। इस बजट का फोकस आर्थिक विकास को रफ्तार देने, रोजगार सृजन और सेवाओं के विस्तार पर रहा। लेकिन आम जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि बजट के बाद रोजमर्रा की कौन-सी चीजें सस्ती होंगी और किन पर महंगाई का असर पड़ेगा। बजट में किए गए टैक्स बदलाव मुख्य रूप से कस्टम ड्यूटी, एक्साइज ड्यूटी, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) से जुड़े हैं।
ये चीजें हुईं सस्ती
कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत देते हुए 17 जरूरी कैंसर दवाओं पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है, जिससे इलाज की लागत कम होगी। ई-व्हीकल और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए बैटरी स्टोरेज, सोलर ग्लास, लिथियम-आयन सेल्स और हरित ऊर्जा से जुड़े उपकरणों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में छूट दी गई है।
विदेश में पढ़ाई और मेडिकल इलाज के लिए भेजी जाने वाली रकम पर TCS घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 5 प्रतिशत था। इसी तरह विदेशी टूर पैकेज पर भी TCS घटने से विदेश यात्रा थोड़ी सस्ती होगी। आईटी और क्लाउड सेवाओं के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों को टैक्स राहत दी गई है, जिससे डिजिटल और क्लाउड आधारित सेवाओं के दाम भविष्य में कम हो सकते हैं।
Budget 2026-27 : इन चीजों पर बढ़ सकता है खर्च
शेयर बाजार में फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग करने वालों के लिए झटका है, क्योंकि STT बढ़ा दिया गया है, जिससे ट्रेडिंग महंगी हो सकती है। सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर वैश्विक दबाव और टैक्स बदलावों का असर कीमतों पर देखने को मिल सकता है। सरकार ने बजट घाटा काबू में रखने पर जोर दिया है, ऐसे में आगे चलकर कुछ सब्सिडी और छूट सीमित होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
आम लोगों के लिए राहत की बातें
बजट में छोटे टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने और संशोधन की ज्यादा सुविधा दी गई है। MAT, TDS और TCS नियमों को सरल बनाया गया है। MSME, स्टार्टअप और नौकरीपेशा लोगों के लिए सपोर्ट बढ़ाया गया है। साथ ही हेल्थ, एजुकेशन, टूरिज्म और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े निवेश का ऐलान किया गया है, जिससे रोजगार और सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है।
Budget 2026-27 : कुल मिलाकर बजट 2026-27 में जहां कुछ चीजें आम लोगों के लिए सस्ती होंगी, वहीं निवेश और ट्रेडिंग से जुड़े क्षेत्रों में खर्च बढ़ सकता है।
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