
वायरल हुआ नाम, वीडियो नहीं
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कई अनजान अकाउंट्स दावा कर रहे हैं कि फातिमा जटोई का एक निजी वीडियो मौजूद है, जिसकी लंबाई 6 मिनट 39 सेकंड बताई जा रही है। इन्हीं दावों के कारण लोग अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर इसे लगातार सर्च कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इतनी चर्चा के बावजूद किसी भी विश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर ऐसा कोई “ओरिजिनल वीडियो” सामने नहीं आया है। ट्रेंड सिर्फ नाम का है, वीडियो का नहीं।
6 Minutes 39 Seconds : फैक्ट-चेक में क्या निकला सामने
जब साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और फैक्ट-चेक करने वाली टीमों ने इस पूरे मामले की जांच की, तो सच्चाई बिल्कुल अलग निकली। जांच में साफ हुआ कि इस नाम से जुड़ा कोई प्रमाणिक वीडियो मौजूद ही नहीं है। कई पोस्ट और वेबसाइट्स अलग-अलग कहानियां गढ़ रही हैं, लेकिन किसी के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा ट्रेंड महज क्लिकबेट हो सकता है, ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा सर्च करें और व्यूज बढ़ाए जा सकें।
डीपफेक और AI का बढ़ता खतरा
आज के दौर में डीपफेक और AI तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी है कि किसी की तस्वीर या आवाज का गलत इस्तेमाल कर नकली कंटेंट बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि फातिमा जटोई से जुड़ा यह मामला भी इसी तरह की अफवाहों का हिस्सा हो सकता है। कई बार किसी की लोकप्रियता का फायदा उठाकर कुछ लोग जानबूझकर झूठी कहानी फैलाते हैं, ताकि ट्रैफिक और कमाई बढ़ाई जा सके।
फातिमा जटोई ने तोड़ी चुप्पी
लगातार बढ़ती अफवाहों के बीच फातिमा जटोई ने खुद सामने आकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सोशल मीडिया पर जो कुछ भी फैलाया जा रहा है, वह पूरी तरह से फर्जी है और उसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग जानबूझकर AI और डीपफेक जैसी तकनीक का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।
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