
नई दिल्ली (वीकैंड रिपोर्ट): आधुनिक जीवनशैली के कई साइड इफेक्ट्स हैं जिनमें स्पांडिलाइटिस प्रमुख है। मोबाइल फोन और लैपटॉप पर लगातार झुके रहने और कसरत नहीं करने के कारण रीढ़ की ही के साथ-साथ गरदन में दर्द रहने लगता है। एक पाद राज कापोतासन करने से न सिर्फ रीढ़ की ही को विपरीत दिशा में झुकने का अवसर मिलता है बल्कि पीठ की मांसपेशियों को भी राहत मिलती है। एक पाद राज कापोतासन को यह नाम इसलिए मिला है क्योंकि पाद यानी पैर और राज कापोत यानी कबूतरों का राजा। कबूतर हमेशा अपना सीना तान कर ही बैठता है। इस आसन को करने से सर्वाइक और लंबोसेक्रल स्पांडोलिसिस में राहत मिलती है।
इस आसन को कैसे करें
यह आसन बहुत श्रमसाध्य है और एकाएक सरलता से सिद्ध नहीं होता। इसके लिए शरीर को प्रर्याप्त लचीला होना चाहिए। इस आसन को करने से पहले कुछ हफ्तों तक सामान्य आसनों का अभ्यास करें। जब शरीर के जोड़ इस आसन को करने लायक खुल जाएं तब ही इस आसन को करें।
सावधानी
आरंभिक दौर में यदि हाथ सिर की ओर से पीछे न ले जाया जा सके तो हाथों को नीचे से पीछे ले जाकर पैर की पिंडली या टखने को पकड़ कर भी आसन कर सकते हैं। अतिरेक न करें क्योंकि उससे फायदे के स्थान पर नुकसान अधिक होगा।
कैसे करें
1. बैठ कर पैर सामने की ओर सीधे करें, पंजे पास-पास रखें। हाथ कमर के नजदीक रखें और हथेलियां जमीन पर टिका लें। रीढ़ व गरदन एक सीध में रखें। सांस की गति सामान्य रखें।
2. बाएं पैर को घुटने से मोड़कर एड़ी को उरूसंधि का स्पर्श करा दें। घुटना जमीन पर रहने दें।
3. दाएं पैर को पीछे ले जाएं और सीधा रखें। पंजे खुले रखें। जांघ का अगला हिस्सा, घुटना, पैर का अगला हिस्सा तथा अंगुलियों का ऊपरी हिस्सा जमीन पर टिका रहे।
4. कमर पर हथेलियां रखें। सीने को आगे की ओर निकालें। गरदन तानें और सिर को यथा संभव पीछे की ओर ले जाएं। यह सब करते हुए शरीर का संतुलन भी बनाए रखें।
5. हाथ जमीन पर रखें। दायां घुटना मोड़ें और दाएं पंजे को सिर की ओर उठाएं याद रहे कि टखने से घुटने तक दायां पैर जमीन से लंबरूप रहे। आसन की चरम स्थिति तक पहुंचने के लिए दाईं जांघ की मांसपेशियों को तान लें।
6. सांस भरते हुए बाईं भुजा को सिर के पास ले जाएं और बाएं हाथ से दायां पैर पकड़ें।
7. अभ्यास के लिए इसी स्थिति में बायां हाथ नीचे लाकर दाएं से भी पैर पकड़ सकते हैं। आसन की आदर्श स्थिति में दोनों हाथों से पिछले पैर का पंजा पकड़ा होगा और सिर से स्पर्श करता रहेगा।
8. सीने को थोड़ा और आगे की ओर तानें। नाभि को संकुचित करें। सहज सांस लेते रहें। अपनी क्षमता के अनुसार आसन की पूर्ण स्थिति में रुके रहें।
व्याघ्रासन विधि

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