
जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)- Kali Mudra benefits : आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव, घबराहट, डर, नींद न आना और मानसिक थकान आम समस्याएं बन चुकी हैं। मोबाइल की लत, काम का दबाव और भविष्य की चिंता इंसान को अंदर से कमजोर कर रही है। योग की कई मुद्राओं में से ‘काली मुद्रा’ को खास तौर पर मानसिक शांति, आत्मविश्वास और ऊर्जा संतुलन के लिए बेहद प्रभावी बताया गया है।
काली मुद्रा कैसे करती है मन और शरीर को संतुलित
शरीर में ऊर्जा के प्रवाह के लिए नाड़ियां होती हैं, जिनमें सुषुम्ना नाड़ी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह रीढ़ के बीच से होकर गुजरती है और मन–शरीर के संतुलन को बनाए रखती है। काली मुद्रा इस नाड़ी में ऊर्जा के प्रवाह को सक्रिय और शुद्ध करने में मदद करती है। इसके नियमित अभ्यास से मन की उलझनें कम होती हैं, ध्यान केंद्रित होता है और मानसिक स्थिरता बढ़ती है।
Kali Mudra benefits : शारीरिक स्वास्थ्य के लिए काली मुद्रा के फायदे
काली मुद्रा सांस की प्रक्रिया को बेहतर बनाती है। गहरी और नियंत्रित श्वास से फेफड़े मजबूत होते हैं और शरीर में ऑक्सीजन का संचार बढ़ता है। इससे थकान, जकड़न और शरीर की अकड़न में राहत मिलती है। लंबे समय तक बैठने या मानसिक तनाव के कारण होने वाली शारीरिक परेशानी भी धीरे-धीरे कम होती है।
मानसिक तनाव और चिंता में कारगर उपाय
मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से काली मुद्रा को बेहद प्रभावशाली माना गया है। यह नकारात्मक सोच को कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करती है। पढ़ाई करने वाले बच्चों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और ऑफिस वर्क के दबाव में रहने वालों के लिए यह मुद्रा काफी लाभकारी है।
भावनात्मक और आध्यात्मिक लाभ
भावनात्मक स्तर पर काली मुद्रा डर, गुस्सा, बेचैनी और असुरक्षा जैसी भावनाओं को बाहर निकालने में मदद करती है। आध्यात्मिक रूप से इसे मूलाधार चक्र और मणिपुर चक्र से जोड़ा जाता है। मूलाधार चक्र सुरक्षा और स्थिरता देता है, जबकि मणिपुर चक्र आत्मबल और आत्मविश्वास का केंद्र है। इन चक्रों के सक्रिय होने से साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बढ़ती है।
Kali Mudra benefits : काली मुद्रा करने की आसान विधि
काली मुद्रा का अभ्यास करना बेहद सरल है। इसे सुखासन में बैठकर या ताड़ासन में खड़े होकर किया जा सकता है। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाएं और तर्जनी उंगलियों को ऊपर की ओर सीधा रखें। गहरी सांस लें और छोड़ते समय मन से नकारात्मक विचारों को बाहर निकालने का भाव रखें। शुरुआत में 2–3 मिनट का अभ्यास पर्याप्त है, बाद में समय धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।
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