





धर्म डेस्क (वीकैंड रिपोर्ट)- Ashtami Navami 2026 : शारदीय नवरात्रि में महाष्टमी और महानवमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इन दोनों तिथियों पर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ कन्या पूजन करने की परंपरा है। इस दौरान भक्त छोटी बच्चियों को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं और हलवा, पूरी व चने का प्रसाद खिलाते हैं। हालांकि, इस बार अष्टमी और नवमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। ऐसे में आइए जानते हैं कि 2026 में अष्टमी-नवमी की तिथियां क्या हैं और कन्या पूजन कब किया जा सकता है।
अष्टमी और नवमी 2026 की सही तारीख क्या है?
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि आरंभ होगी, जो 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक बताई गई है। इसी गणना के आधार पर 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी का कन्या पूजन एक साथ करने की बात कही गई है। हालांकि, तिथि और मुहूर्त की गणना स्थानीय पंचांग तथा सूर्योदय के समय के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए पूजा का अंतिम निर्णय लेने से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।
कन्या पूजन के शुभ मुहूर्त
उपलब्ध विवरण में 19 अक्टूबर को कन्या पूजन के लिए ये मुहूर्त बताए गए हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 बजे से 5:40 बजे तक
- अमृत काल: सुबह 7:28 बजे से 9:16 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक
ध्यान दें कि ये समय दिए गए विवरण पर आधारित हैं। अपने शहर के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि स्थानीय पंचांग से करें।
Ashtami Navami 2026 : कन्या पूजन की क्या है धार्मिक मान्यता?
नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। कई परिवारों में नौ कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराने की परंपरा है। बालक को लांगुर या भैरव का प्रतीक माना जाता है। इस पूजा के माध्यम से भक्त मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना करते हैं।
कैसे करें कन्या पूजन? जानें पूरी विधि
- कन्याओं को आमंत्रित करें: अपनी परंपरा के अनुसार छोटी कन्याओं और एक बालक को घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करें।
- स्वागत और पूजन करें: कन्याओं का आदरपूर्वक स्वागत करें। परंपरा के अनुसार उनके पैर धोकर तिलक लगाएं और कलावा बांधें।
- प्रसाद परोसें: कन्याओं को हलवा, पूरी, चने और अन्य प्रसाद श्रद्धापूर्वक खिलाएं।
- दक्षिणा या उपहार दें: भोजन के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपहार भेंट करें।
- आशीर्वाद लेकर विदा करें: कन्याओं का सम्मान करते हुए उनसे आशीर्वाद लें और आदरपूर्वक विदा करें।
अष्टमी-नवमी पर क्यों खास है कन्या पूजन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन मां दुर्गा के प्रति भक्ति, सम्मान और श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम है। नवरात्रि के अंतिम दिनों में होने वाली यह परंपरा घरों में उत्सव का माहौल बनाती है। भक्त विधि-विधान से पूजा कर मां दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
महत्वपूर्ण: अष्टमी-नवमी की तिथियों और बताए गए मुहूर्तों में अंतर संभव है। प्रकाशित करने या पूजा की योजना बनाने से पहले संबंधित शहर के विश्वसनीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लें।
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