





जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)- Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मासिक आलौकिक दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया। सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमानो से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित मासिक अलौकिक हवन यज्ञ के दौरान यज्ञ कुंड में प्रज्वलित पावन अग्नि अपनी दिव्य आभा से पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर रही थी। इसी पावन अवसर पर धाम के पीठ उपासक नवजीत भारद्वाज ने प्रसिद्ध पंक्तियों की व्याख्या करते हुए कहा कि
‘‘बाझ मुरशिदां राह नहीं हथ आउंदे,
दूधां बाज खीर नहीं रिजदी।’’

नवजीत भारद्वाज माँ भक्तों को पंक्तियां का आध्यात्मिक सार समझाते हुए कहते है कि मुरशिद (गुरु) के बिना सही राह हाथ नहीं आती जैसे दूध के बिना खीर नहीं पकती। उन्होंने कहा कि मनुष्य के पास धन हो सकता है, बुद्धि हो सकती है, संसार का ज्ञान हो सकता है, लेकिन जब तक उसे सही दिशा दिखाने वाला संत या मुरशिद (गुरु) नहीं मिलता, तब तक वह जीवन के असली रास्ते को पहचान नहीं पाता।
नवजीत भारद्वाज ने कहा कि अक्सर लोग कहते हैं भगवान के साथ कैसे जुड़े? लेकिन सवाल यह है कि रास्ता कौन बताएगा? जैसे कोई व्यक्ति किसी अनजान शहर में पहुंच जाए। उसके सामने दस रास्ते हों। वह अपनी इच्छा से कोई भी रास्ता पकड़ सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह मंजिल तक पहुंचे।

Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : तभी कोई अनुभवी व्यक्ति कहता है- ‘‘इस रास्ते पर चलो, यहां से मुड़ना, यहां रुकना और इस रास्ते से मंजिल तक पहुंच जाना।’’ बस यही काम मुरशिद (गुरु) करता है। नवजीत भारद्वाज जी ने माँ भक्तों को बड़ी गहराई से समझाते हुए कहा कि आज इंसान के पास जानकारी बहुत है, लेकिन दिशा कम है। आज हमारे पास मोबाइल है, इंटरनेट है, किताबें हैं, हजारों तरह का ज्ञान है। लेकिन फिर भी मन अशांत है। क्योंकि जानकारी और आत्मज्ञान में बहुत अंतर है।
उन्होंने कहा कि दुनिया हमें बताती है कि धन कमाओ। पर मुरशिद हमें समझाता है कि ‘‘धन कमाओ, लेकिन धन को अपने मन का मालिक मत बनाओ।’’ दुनिया कहती है जो तुम्हारे साथ बुरा करे, उससे बदला लो। पर मुरशिद कहता है कि ‘‘क्षमा करना सीखो।’’ दुनिया कहती है कि लोगों से आगे निकलो। पर मुरशिद कहता है ‘‘अपने अहंकार से आगे निकलो।’’ यही मुरशिद की शिक्षा है।

नवजीत भारद्वाज ने ‘‘दूध के बिना खीर नहीं पकती’’ इस पंक्ति का सार प्रभु भक्तों को समझाते हुए कहा कि चावल हैं, चीनी है, मेवे हैं, इलायची है; लेकिन दूध ही नहीं है। तो क्या खीर बनेगी? इसी तरह हमारे जीवन में पैसा हो सकता है, मकान हो सकता है, गाड़ी हो सकती है, रिश्ते हो सकते हैं, समाज में प्रतिष्ठा हो सकती है; लेकिन अगर जीवन में प्रभु के नाम का दूध नहीं, तो भीतर की खीर कैसे पकेगी? पहले अपने भीतर की दुनिया को संवारो, फिर बाहर की दुनिया अपने आप सुंदर लगने लगेगी। जब मनुष्य अपने भीतर उतरना शुरू करता है और उस भीतर की यात्रा में मुरशिद (गुरु) दीपक की तरह होता है।
नवजीत भारद्वाज ने प्रवचन के अंत में माँ भक्तों को संदेश देते हुए कहा कि सिर्फ मुरशिद (गुरु) मिल जाना काफी नहीं। यह बात भी समझना जरूरी है। अगर कोई डॉक्टर दवा दे और मरीज दवा खाए ही नहीं, तो बीमारी कैसे ठीक होगी? अगर मुरशिद रास्ता दिखाए और हम चलें ही नहीं, तो मंजिल कैसे मिलेगी? इसलिए मुरशिद दिशा देता है, कदम हमें उठाने पड़ते हैं। मुरशिद नाम देता है, सुमिरन हमें करना पड़ता है। मुरशिद ज्ञान देता है, जीवन हमें बदलना पड़ता है। और यही असली साधना है।

Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : इस अवसर पर कंठ जज, श्वेता भारद्वाज, निर्मल शर्मा, राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर,अमरेंद्र कुमार शर्मा, वैशाली ,मनमोहन भटटी,हरप्रित,समीर,ॠषभ कालिया,रमन,बलजिंदर सिंह,सवी,रोहित गौतम,रीटा शर्मा,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा, कमलजीत,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा,मुकेश,गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा,रवि भल्ला,जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, नरेंद्र, सौरभ सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे। हवन यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।
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