

नई दिल्ली (वीकैंड रिपोर्ट)- RBI Polymer Currency Notes India : देश की करेंसी व्यवस्था में जल्द एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कागज के नोटों की जगह पॉलिमर (Plastic) करेंसी नोट लाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। शुरुआती चरण में ₹10 और ₹20 के नोट पॉलिमर सामग्री से जारी किए जा सकते हैं। इस दिशा में RBI की सहायक कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट प्रिंटिंग प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने ट्रांसपैरेंट पॉलिमर सब्सट्रेट शीट की आपूर्ति के लिए ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि देश में प्लास्टिक नोटों की शुरुआत की तैयारी चल रही है।
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब भारत में पॉलिमर नोट लाने की योजना बनाई गई हो। इससे पहले 2007-2012 और फिर 2016 में भी इस दिशा में प्रयास किए गए थे, लेकिन विभिन्न कारणों से योजना लागू नहीं हो सकी। अब तीसरी बार इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है और माना जा रहा है कि इस बार सरकार और RBI इसे अमल में लाने के लिए गंभीर हैं।
क्या होते हैं पॉलिमर नोट?
पॉलिमर नोट पारंपरिक कागज से नहीं, बल्कि Biaxially Oriented Polypropylene (BOPP) नामक विशेष सिंथेटिक प्लास्टिक से बनाए जाते हैं। यह सामग्री बेहद मजबूत, हल्की, लचीली और पानी व नमी से सुरक्षित होती है। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया और रोमानिया जैसे कई देशों में वर्षों से इनका सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।
RBI Polymer Currency Notes India : कागज के नोटों से कितने अलग होंगे प्लास्टिक नोट?
मौजूदा भारतीय नोट लगभग 75% कपास और 25% लिनन से तैयार किए जाते हैं। ये जल्दी गंदे हो जाते हैं, पानी या नमी से खराब हो सकते हैं और बार-बार इस्तेमाल के कारण फटने की संभावना भी अधिक रहती है। वहीं पॉलिमर नोटों की उम्र कागजी नोटों की तुलना में 2.5 से 4 गुना अधिक होती है। ये आसानी से नहीं फटते, पानी से खराब नहीं होते, गंदगी और बैक्टीरिया कम पकड़ते हैं तथा लंबे समय तक नए जैसे बने रहते हैं। इन्हें मोड़ा भी जा सकता है और बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।
नकली नोटों पर कैसे लगेगी रोक?
पॉलिमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत इनकी Transparent Window, Hologram, Colour-Shifting Ink और अन्य हाई-टेक सिक्योरिटी फीचर्स हैं। इन आधुनिक सुरक्षा तकनीकों की नकल करना बेहद कठिन होता है, जिससे फेक करेंसी बनाने वाले गिरोहों पर काफी हद तक रोक लग सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलिमर नोट भारत की करेंसी सुरक्षा को एक नया स्तर दे सकते हैं।
सरकार को होगा बड़ा आर्थिक फायदा
RBI के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में नोटों की छपाई पर लगभग ₹6,372 करोड़ और 2025-26 में करीब ₹4,875 करोड़ खर्च किए गए। पॉलिमर नोटों की शुरुआती छपाई महंगी जरूर होती है, लेकिन उनकी लंबी उम्र के कारण बार-बार नए नोट छापने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे छपाई, परिवहन और पुराने नोटों को नष्ट करने पर होने वाला सरकारी खर्च काफी कम हो सकता है।
RBI Polymer Currency Notes India : किन चुनौतियों का करना होगा सामना?
प्लास्टिक नोट लागू करना आसान नहीं होगा। इसके लिए देशभर के ATM, बैंकिंग सिस्टम और नोट गिनने वाली मशीनों को नए नोटों के अनुरूप अपग्रेड करना पड़ेगा। इसके अलावा अधिक तापमान में पॉलिमर नोटों के आकार पर असर पड़ने और उनकी रीसाइक्लिंग की लागत भी चुनौती बन सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में इसके फायदे इन चुनौतियों से कहीं अधिक होंगे। यदि RBI की यह योजना सफल होती है, तो आने वाले समय में भारत की करेंसी प्रणाली पूरी तरह बदल सकती है। इससे न केवल नकली नोटों की समस्या कम होगी, बल्कि नोटों की गुणवत्ता, सुरक्षा और टिकाऊपन में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
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