
जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)- Punjab Police News : पंजाब में पुलिस व्यवस्था को लेकर एक बार फिर जनता का गुस्सा सामने आ रहा है। आम लोगों का आरोप है कि Punjab Police में फिटनेस मानकों की हालत बेहद खराब है। सड़कों और थानों में तैनात कई पुलिसकर्मी मोटापा, शारीरिक कमजोरी और चलने-फिरने में असमर्थता से जूझते दिखते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिटनेस के बजाय वसूली पर फोकस?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अपराध, झगड़े या आपात स्थिति में पुलिस की रिस्पॉन्स टाइम कमजोर रहती है, लेकिन ट्रैफिक चालान, नाकाबंदी और वसूली के मामलों में पुलिस पूरी तरह सक्रिय नजर आती है। जनता का आरोप है कि फिटनेस और प्रशिक्षण की अनदेखी के चलते पुलिस की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
Punjab Police News : कानून-व्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस बल की शारीरिक फिटनेस सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था से जुड़ी होती है। कमजोर फिटनेस का असर—अपराधियों का पीछा करने में दिक्कत, भीड़ नियंत्रण में कमी, आपात हालात में सुस्ती, जैसी समस्याओं के रूप में सामने आता है।
जनता की मांग है कि नियमित फिटनेस टेस्ट, मेडिकल जांच और प्रशिक्षण अनिवार्य किए जाएं, ताकि बल चुस्त-दुरुस्त रहे और फील्ड ड्यूटी प्रभावी ढंग से निभाई जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक पुलिसिंग के लिए शारीरिक फिटनेस, तकनीकी कौशल और व्यवहारिक प्रशिक्षण—तीनों ज़रूरी हैं।
Punjab Police News : नागरिक समूहों ने प्रशासन से पारदर्शिता, जवाबदेही और आंतरिक निगरानी मजबूत करने की अपील की है। उनका कहना है कि शिकायत निवारण तंत्र को तेज़ और भरोसेमंद बनाया जाए, ताकि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सके और दोषियों पर कार्रवाई हो।
फिलहाल, ये जनता के आरोप और मांगें हैं। प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। लोगों को उम्मीद है कि सुधारात्मक कदम उठाकर पुलिस–जनता संबंधों को बेहतर किया जाएगा।
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