
नई दिल्ली (वीकैंड रिपोर्ट)- Iran Internet Shutdown : ईरान में इस्लामी सरकार के खिलाफ जनविद्रोह तेज हो गया है। बढ़ती महंगाई, कमजोर होती अर्थव्यवस्था और सुरक्षा बलों की दमनकारी कार्रवाइयों से नाराज़ लोग सैयद अली हुसैनी खामेनेई के नेतृत्व वाली व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। देशभर में सरकार-विरोधी नारे गूंज रहे हैं और हालात दिन-ब-दिन ज्यादा तनावपूर्ण होते जा रहे हैं।
8 जनवरी की रात स्थिति और बिगड़ने के बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के नेतृत्व वाली सरकार ने एहतियातन इंटरनेट सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन कॉल बंद कर दीं। वहीं, न्यायपालिका और सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारियों ने “कानून-व्यवस्था बहाल करने” के नाम पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी जारी की है।
इस आंदोलन को उस वक्त और बल मिला जब युवराज रज़ा पहलवी ने गुरुवार और शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार रात 8 बजे लोगों से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। उनके पिता 1979 की इस्लामी क्रांति से ठीक पहले ईरान छोड़ चुके थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही रात 8 बजे, तेहरान के कई इलाकों में नारेबाज़ी शुरू हो गई। प्रदर्शनकारियों ने “तानाशाह मुर्दाबाद”, “इस्लामी गणराज्य मुर्दाबाद” और “यह आखिरी लड़ाई है, पहलवी वापस लौटेगा” जैसे नारे लगाए।
Iran Internet Shutdown : शहरों के साथ-साथ ग्रामीण कस्बों में भी विरोध प्रदर्शन जारी रहे। कई बाजार और दुकानें बंद रहीं, जिससे आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने के संकेत मिले। अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी के अनुसार, प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक कम से कम 42 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
हालात पर काबू पाने के लिए सरकार कड़े कदम उठा रही है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि महंगाई और बेरोज़गारी से त्रस्त जनता का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। ईरान इस वक्त अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकटों में से एक का सामना कर रहा है।
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