
जालंधर (प्रदीप वर्मा) – Fake internship scam : अवैध कामों के लिए हमारा जालंधर मशहूर कम बदनाम ज्यादा होता जा रहा है। जालंधर के कई एजुकेशन इंस्टीच्यूट ऐसे हैं जहां पर मीडिया इंटर्नशिप के नाम पर स्टूडेंट्स को ठगा जा रहा है। ठगी का सिलसिला शुरू होने का तरीका यह है कि पहले स्टूडेंट्स को इंटर्नशिप के नाम पर जाल में फंसाया जाता है और कहा जाता है आपने हमारे इंस्टीटयूट से जो कोर्स किया है उसके एवज में हम आपको सर्टिफिकेट तो देंगे ही इसके अलावा जालंधऱ के बड़े बड़े संस्थानों में आपकी इंटर्नशिप करवाएंगे जिसके आपको अलग से पैसे देने पड़ेंगे। हर स्टूडेंट को कोर्स के बाद नाैकरी की तलाश रहती है और इंटर्नशिप उन्हें नाैकरी पाने का कदम लगती है। इस कारण वह इंटर्नशिप के लिए हां कर देते हैं और जहां शैक्षणिक संस्थान का स्टाफ कहता है वहां इंटर्नशिप शुरू कर देते हैं।
Fake internship scam : इसके बाद असली खेल शुरू होता है। इंटर्नशिप चाहे कम समय की हो लेकिन स्टूडेंट्स के प्रमाण पत्र में शैक्षणिक संस्थान वाले ज्यादा समय लिख देते हैं और इसके एवज में ज्यादा पैसे लेते हैं। सबसे बड़ी बात ये सारे काम शैक्षणिक संस्थानों की पीआर टीम करती है और शैक्षणिक संस्थान के मालिक को पता भी नहीं होता कि उसके संस्थान का स्टूडेंट ऐसे संस्थान में इंटर्नशिप कर रहा है जिस संस्थान का वजूद ही नहीं है। वीकैंड रिपोर्ट के पास ऐसा ही एक प्रमाण पत्र साक्ष्य के रूप में माैजूद है और जल्द ही पाठकों के समक्ष उसे प्रस्तुत किया जाएगा।
दरअसल फेक संस्थानों की गलतियों में बच्चे पिस रहे हैं और लाखों रुपए कोर्स पर लगाने के बावजूद उन्हें बच्चों की नाैकरी के लिए फिर हजारों रुपए देने पड़ते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि फेक इंटर्नशिप के कारण बच्चे प्रैक्टिकल रूप से कुछ सीख भी नहीं पाते। हाल यह है कि घोटालों का पर्दाफाश करने वाले भविष्य के पत्रकार खुद घोटालों की पैदाइश बनते जा रहे हैं।
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