
भोपाल 31 मार्च 2026: (वीकैंड रिपोर्ट) Love Jihad : मध्य प्रदेश की राजधानी एक बार फिर ‘धोखे वाली दोस्ती’ और जबरन धर्मांतरण के आरोपों से दहल उठी है। एक कॉलेज छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और ब्लैकमेलिंग के इस मामले ने इंटरनेट पर अजनबियों से दोस्ती करने के खतरों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आरोपी ने न केवल अपनी पहचान छिपाई, बल्कि पीड़िता को शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित कर नमाज पढ़ने और धर्म बदलने के लिए भी मजबूर किया।
छल की शुरुआत: ‘आदित्य’ की आड़ में शादाब का जाल
मूल रूप से बैतूल की रहने वाली और भोपाल के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में चौथे वर्ष की छात्रा, जनवरी 2025 में इंस्टाग्राम पर “आदित्य” नामक युवक के संपर्क में आई।
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विश्वास का कत्ल: महीनों तक खुद को हिंदू बताकर आरोपी ने छात्रा का भावनात्मक विश्वास जीता।
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ग्वालियर में वारदात: शादी का झांसा देकर आरोपी पीड़िता को ग्वालियर ले गया, जहाँ उसने कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म किया।
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पहचान का खुलासा: वारदात के बाद आरोपी ने अपनी असली पहचान “शादाब” के रूप में उजागर की, जिसे सुनकर पीड़िता के पैरों तले जमीन खिसक गई।
Love Jihad : ब्लैकमेलिंग और ‘नमाज’ का दबाव
आरोप है कि शादाब ने केवल बलात्कार तक ही बस नहीं किया, बल्कि पीड़िता को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेने के लिए डिजिटल हथियारों का इस्तेमाल किया।
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अश्लील वीडियो: आरोपी ने छात्रा के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बना लिए और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर उसे चुप रहने पर मजबूर किया।
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जबरन धर्मांतरण: पीड़िता का आरोप है कि शादाब उस पर इस्लाम अपनाने और नियमित रूप से नमाज पढ़ने के लिए भारी दबाव डाल रहा था।
पुलिस की कार्रवाई: SIT जांच और कड़े कानून का शिकंजा
भोपाल पुलिस ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। शहर में पिछले कुछ समय में “राजा” और अन्य फर्जी नामों से महिलाओं को फंसाने के मामले सामने आए हैं, जिसके बाद पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत इस तरह के मामलों में 10 साल तक की जेल और ₹1 लाख तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है। पुलिस अब डिजिटल ट्रेल, चैट लॉग्स और कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए सबूत जुटा रही है।
Love Jihad : एक चेतावनी : सोशल मीडिया पर बढ़ता जोखिम
यह मामला एक कड़वा सबक है कि कैसे इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘यौन ग्रूमिंग’ और पहचान छुपाकर किए जाने वाले अपराधों के केंद्र बन रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में पिछले 5 वर्षों में ऐसे 280 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 40% अकेले भोपाल और इंदौर से हैं।
यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह केवल एक व्यक्तिगत विश्वासघात नहीं बल्कि समाज और कानून के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश है, जिसके लिए कड़ी से कड़ी सजा और ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अनिवार्य है।
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