
Gold Price Falls Despite Middle East War, Dollar Strength and Oil Surge Hit Gold Market
बिजनेस डेस्क (वीकैंड रिपोर्ट) Gold price falls despite war tension : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान पर अमेरिका व इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बीच वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता देखी जा रही है। आम तौर पर युद्ध या भू-राजनीतिक संकट के समय निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी कीमतों में तेजी आती है। लेकिन इस बार हालात इसके बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। युद्ध जैसे माहौल के बावजूद सोने की कीमतों में गिरावट ने बाजार विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है।
फरवरी के अंत में जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने लगा था, तब स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 5,244 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर थी। हालांकि कुछ ही दिनों में कीमतों में नरमी आई और 6 मार्च तक यह गिरकर करीब 5,120 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। विशेषज्ञों के मुताबिक यह गिरावट इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि आम तौर पर ऐसे संकट के दौरान सोने की मांग बढ़ जाती है।
रिकॉर्ड तेजी के बाद आई सुस्ती
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। वर्ष 2025 में सोना करीब 65 प्रतिशत तक चढ़ा, जबकि 2026 की शुरुआत में भी इसमें 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। जनवरी 2026 में सोने की कीमत 5,418 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। इसके बाद बाजार में मुनाफावसूली और सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिसे विश्लेषक “कंसोलिडेशन फेज” मान रहे हैं।
सरल शब्दों में कहें तो सोना अपनी अगली बड़ी छलांग से पहले एक सीमित दायरे में ठहराव की स्थिति में था, लेकिन युद्ध के बीच इसकी कीमतों का गिरना बाजार के लिए चिंता का संकेत बन गया है।
Gold price falls despite war tension : डॉलर की मजबूती बना बड़ा कारण
सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी माना जा रहा है। संकट के समय निवेशक आम तौर पर दो सुरक्षित विकल्प चुनते हैं—सोना और अमेरिकी डॉलर। इस बार डॉलर ज्यादा मजबूत साबित हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के उप प्रबंध निदेशक डैनियल कैट्ज के अनुसार वैश्विक वित्तीय प्रणाली में डॉलर की भूमिका अभी भी प्रमुख है और संकट के समय निवेशक नकदी को प्राथमिकता देते हैं।
तेल की कीमतों का असर
मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण Brent Crude Oil की कीमतों में भी 20 प्रतिशत से ज्यादा उछाल आया है। चूंकि कच्चे तेल का व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए कई देशों और कंपनियों को बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत पड़ रही है। इस मांग को पूरा करने के लिए कुछ निवेशक अपने सोने के निवेश को बेचकर नकदी जुटा रहे हैं, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
Gold price falls despite war tension : फेडरल रिजर्व की नीतियों का प्रभाव
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की नीतियां भी सोने के बाजार को प्रभावित कर रही हैं। पहले उम्मीद थी कि 2026 में ब्याज दरों में कटौती हो सकती है, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका है। ऐसे में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे निवेशक सोने के बजाय बॉन्ड जैसे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी घटी
Gold price falls despite war tension : दूसरी ओर केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी में भी गिरावट आई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार 2025 में वैश्विक सोने की मांग 5,000 टन से अधिक रही थी और केंद्रीय बैंक हर महीने औसतन 27 टन सोना खरीद रहे थे। लेकिन जनवरी 2026 में यह खरीद घटकर करीब 5 टन रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
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